लेख
18-Mar-2026
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याद करें वह दिन, जब बिजली कटौती होती थी तो पूरा प्रदेश अंधेरे के साये में डूब जाता था। ग्रामीण ही नहीं बल्कि शहरी इलाकों में बिजली की आँख मिचोली आम बात थी। समय बदला और बीते दो दशक के दौरान मध्यप्रदेश बिजली उत्पादन की दिशा में देश के अन्य राज्यों क¢ लिये नजीर बन गया। एक तरफ जहाँ प्रदेश के सुदृर क्षेत्रों में स्थित शिक्षण संस्थानों में भरपूर बिजली सप्लायी हो रही है वहीं किसानों के लिये खेतों में पानी पहुँचाने के लिये बिजली की कोई कमी नहीं है। प्रसंगवश बता दें कि बिजली की उपलब्धता को बढ़ाने के लिये चल रही विभिन्न योजनाओं ने मध्यप्रदेश को सरप्लस बिजली वाला प्रदेश बना दिया है। वर्तमान में जिन परियोजनाओं पर काम चल रहा है, कहने में संकोच नहीं कि सन् 2028 के आते आते इतनी अधिक मात्रा में आवश्यकता के अनुरूप बिजली उत्पन्न होने लगेगी कि राज्य स्थायी रूप से बिजली संकट से मुक्त हो जायेगा। बताते चलें कि देश में छह बड़े राज्य ऐसे हैं जो सर्वाधिक बिजली उत्पन्न कर रहें हैं। संतोष की बात है कि उन राज्यों की श्रेणी में मध्यप्रदेश भी शुमार हो चुका है। इस तरह मध्यप्रदेश सरप्लस पॉवर स्टेशन बन चुका है। गरीब और मध्यम वर्ग को सस्ती तथा निम्न दर पर बिजली उपलब्ध करवाकर कीर्तिमान रचने वाले मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के शब्दों में श्श्अंधेरे का युग वर्षो पहले समाप्त हो चुका है। मध्यप्रदेश अब ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया है। किसान भाईयों, शहरी नागरिकों और औद्योगिक इकाईयों को भरपूर बिजली दी जा रही है।श्श् प्रदेश में बिजली खपत की चिंता और बिजली की जरुरत पर प्रदेश सरकार निरंतर समीक्षा करती है। मोहन यादव सरकार बिजली की उपलब्धता को दिनोदिन बढ़ाने के लिये सारे जतन कर रही है। सिर्फ शहर ही नहीं बल्कि गांवों को भी प्राथमिकता के आधार पर भरपूर रोशन किया जा रहा है। मध्यप्रदेश बिजली बोर्ड का गठन एक दिसम्बर 1950 को हुआ था और 1952 में इसने काम करना शुरू किया था। इसके बाद प्रदेश का विभाजन हुआ और बिजली के कुशल प्रबंधन के लिये राज्य विद्युत बोर्ड को सन् 2002 में पुर्नगठित कर दिया गया। जुलाई 2002 में बिजली उत्पादन एवं वितरण के लिये तीन विधुत कंपनियों की स्थापना की गयी। मध्यप्रदेश में विद्युत संयंत्र स्थापित किये गये जिनमें थर्मल पॉवर प्लांट, जल विद्युत संयंत्र और परमाणु ऊर्जा संयंत्र शामिल हैं। कुछ प्रमुख विद्युत संयंत्रों में अमरकंटक, संजय गांधी, सतपुड़ा और सिंगाजी थर्मल पॉवर प्लांट शामिल हैं। प्रदेश में बिजली से संबंधित कई योजनायें चल रही हैं, जिनमें अटल गृह ज्योति और पी.एम. सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना प्रमुख हैं। अटल गृह ज्योति योजना का उद्देश्य कम ऊर्जा खपत वाले घरेलु उपभोक्ताओं को बिजली बिलों में सब्सिडी देना है। जबकि पी.एम. सूर्य घर योजना का लक्ष्य घर को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना है। मध्यप्रदेश के उमरिया जिले के बिरसिंहपुर में संजय गांधी थर्मल पॉवर 1340 मेगावाट की क्षमता वाला कोयला आधारित बिजली संयंत्र है, जबकि सतपुड़ा थर्मल पॉवर स्टेशन बैतूल जिले के सारनी में स्थित है, यह प्रदेश का तीसरा बड़ा बिजली संयंत्र है। प्रदेश में पवन ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिये सरकार द्वारा वर्ष 2011 में पवन ऊर्जा परियोजना नीति की शुरुआत हुयी थी। प्रदेश के इंदौर, मंदसौर, देवास, रतलाम, राजगढ़ और आगर मालवा जिलों में पवन चक्कियां स्थापित की गयीं हैं। इसके साथ ही प्रदेश में अपारम्परिक ऊर्जा स्त्रोतों से भी बिजली उत्पादन की परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने के लिये युद्ध स्तर पर प्रयास किये जा रहे हैं। अमरकंटक, बिरसिंहपुर और सीधी में विद्युत उत्पादन को बढ़ाने के लिये आवश्यक संसाधन जुटायें जा रहे हैं। नवकरणीय ऊर्जा क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुयी है। नवकरणीय ऊर्जा क्षमता में देश के पाँच राज्यों के बाद मध्यप्रदेश का स्थान है। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में स्थापित नवकरणीय ऊर्जा क्षमता के मुकाबले मध्यप्रदेश छठवें नम्बर पर है। यहँा बता दें कि नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश अब तक 9508 मेगावॉट क्षमता स्थापित कर चुका है। बिजली उत्पादन और उसकी क्षमता बढ़ाने के लिये प्रदेश में विभिन्न माध्यमों से संयंत्रों और इकाईयों की स्थापना की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लक्ष्य के अनुरूप बिजली के मामले में मध्यप्रदेश को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिये संयंत्रों पर अत्यधिक व्यय किया जा रहा है। मोहन यादव सरकार का स्पष्ट संकेत है कि आने वाले 5 से 7 वर्षो के दौरान मध्यप्रदेश पूर्ण रूप से बिजली संकट से मुक्त होकर ऐसे राज्यों के लिये अनुसरण बन जायेगा जो बिजली की उपलब्धता के मामले में कमजोर हैं या फिर उनकी नीतियां, कार्यक्रम सटीक नहीं हैं। बिजली की पूर्ति एक आवश्यक मूलभूत सुविधा है। इसका आवश्यकतानुसार ही उपयोग हो तो बेहतर होता है। प्रदेश के उद्योग भी बिजली पर निर्भर हैं इसलिए बिजली की बचत पर भी सबका ध्यान आर्कषित कराना चाहिये। आमजन को भी बिजली के उपयोग और उसकी बचत के बारे में सचेत करना जरूरी है, क्योंकि बिना जनसहभागिता के किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करना कठिन होता है। (यह लेखक के व्य‎‎‎क्तिगत ‎विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अ‎निवार्य नहीं है) .../ 18 मार्च /2026