लेख
18-Mar-2026
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-दुर्लभ संगम-सर्वधर्म समभाव की वैश्विक मिसाल गुड़ी पड़वा,चैत्र नवरात्र,चेट्रीचंड्र, ईद-उल-फितर और राम नवमी- एक ऐसा दुर्लभ संगम जो भारत की धर्मनिरपेक्षता को सशक्त व सर्वधर्म समभाव की अवधारणा को जीवंत करता है जब गुड़ी पड़वा,नवरात्र,चेट्रीचंड्र, ईद और राम नवमी जैसे पर्व एक साथ मनाए जाते हैं,तो यह संदेश पूरी दुनियाँ तक जाता है कि विविधता के बावजूद एकता संभव है वैश्विक स्तरपर भारत, जिसे सदियों से आध्यात्मिकता, सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक सह- अस्तित्व की भूमि के रूप में जाना जाता है, मार्च 2026 में एक अद्भुत और प्रेरणादायक दृश्य प्रस्तुत कर रहा है।यह वह समय है जब विभिन्न धर्मों और समुदायों के प्रमुख त्योहार लगभग एक ही सप्ताह के भीतर मनाए जा रहे हैं,एक ऐसा दुर्लभ संगम जो न केवल भारत की धर्मनिरपेक्षता को सशक्त बनाता है,बल्कि “सर्वधर्म समभाव” की उस अवधारणा को भी जीवंत करता है, जो भारतीय संविधान और सामाजिक ताने-बाने की आत्मा है।19 मार्च से 27 मार्च 2026 के बीच का यह समयखंड केवल कैलेंडर का संयोग नहीं है,बल्कि यह भारत की सामाजिक चेतना,सांस्कृतिक समृद्धि और पारस्परिक सम्मान का उत्सव है।इस अवधि में गुड़ी पड़वा,चैत्र नवरात्र,चेट्री चंड्र ,ईद-उल-फितर और राम नवमी जैसे प्रमुख पर्व एक के बाद एक मनाए जाएंगे।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि यह विविधता में एकता का ऐसा सशक्त उदाहरण है,जिसे दुनियाँ के सामने एक सांस्कृतिक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। साथियों बात अगर हम सबसे पहले आने वाले त्योहार गुड़ी पड़वा: नववर्ष, विजय और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक इसको समझने की करें तो19 मार्च 2026 को मनाया जाने वाला गुड़ी पड़वा महाराष्ट्र और आसपास के क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिन चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को आता है और हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन घरों के बाहर गुड़ी” स्थापित की जाती है जो विजय, समृद्धि और शुभता का प्रतीक होती है।गुड़ी में नीम के पत्ते,आम की पत्तियां, पुष्पमाला और एक उल्टा रखा हुआ तांबे का कलश शामिल होता है।यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी है, बल्कि यह ऐतिहासिक विजय विशेषकर राजा शालिवाहन की जीत का भी स्मरण कराती है। सुबह तेल स्नान, नए वस्त्र धारण करना और “पूरन पोली” जैसे पारंपरिक व्यंजनों का सेवन इस त्योहार को और भी खास बनाता है।यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह वसंत ऋतु के आगमन,कृषि चक्र के पुनरारंभ और सामाजिकनवजीवन का प्रतीक भी है। गुड़ी पड़वा भारतीय समाज की उस सकारात्मक ऊर्जा को दर्शाता है, जिसमें हर नया वर्ष नई आशाओं और अवसरों के साथ शुरू होता है। चैत्र नवरात्र: शक्ति, साधना और आध्यात्मिक अनुशासन का पर्व है। साथियों बात अगर हम उसी दिन दूसरे त्यौहार चैत्र नवरात्र को समझने की करें तो गुड़ी पड़वा के साथ ही 19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्र का शुभारंभ हो रहा है, जो 27 मार्च तक चलेगा। यह नौ दिनों का पर्व देवी दुर्गा के नौ रूपों की उपासना का समय है। इस दौरान श्रद्धालु उपवास रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और आत्मसंयम का पालन करते हैं।इस वर्ष विशेष बात यह है कि मां दुर्गा “पालकी” (डोली) पर सवार होकर आएंगी, जिसे शुभ संकेत माना जाता है। घट स्थापना का शुभ मुहूर्त 19 मार्च की सुबह 06:52 से 07:43 के बीच निर्धारित है। यह समय आध्यात्मिक ऊर्जा के जागरण और नए संकल्पों की शुरुआत का प्रतीक है।चैत्र नवरात्र केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, अनुशासन और सकारात्मकता का संदेश भी देता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में संतुलन और आत्मनियंत्रण कितना महत्वपूर्ण है। साथियों बात अगर हम चेट्रीचंद्र सिंधी समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और आस्था का उत्सव इसको समझने की करें तो,20 मार्च 2026 को मनाया जाने वाला चेटी चंद सिंधी समुदाय का प्रमुख पर्व है, जो उनके नववर्ष का आरंभ भी है। यह दिन भगवान झूलेलाल को समर्पित होता है, जिन्हें जल देवता के रूप में पूजा जाता है।“चेटी चंद” का अर्थ है “चैत्र का चंद्रमा”,जो नईशुरुआत और आशा का प्रतीक है। इस दिन सिंधी समुदाय झांकियां निकालता है, भजन-कीर्तन करता है और सामूहिक रूप से उत्सव मनाता है।यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह सिंधी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। यह दर्शाता है कि भारत में हर समुदाय अपनी विशिष्ट पहचान को बनाए रखते हुए राष्ट्रीय एकता में योगदान देता है।सिंधी समाज पर हो रहे अत्याचार की पुकार सुन जल देवता से आकाशवाणी के 2 दिन बाद चैत्र माह की शुक्ल पक्ष में नासरपुर (पाकिस्तान की सिन्धु घाटी) के देवकी व ताराचंद के यहाँ एक बेटे ने जन्म लिया, जिसका नाम उदयचंद रखा गया। हिंदी में उदय का मतलब उगना होता है। भविष्य में ये छोटा बच्चा हिन्दू सिन्धी समाज का रक्षक बना, जिसने मिरक शाह जैसे शैतान का अंत किया अपने नाम को चरितार्थ करते हुए उदयचंद जी ने सिंध के हिंदुओ के जीवन के अँधेरे को खत्म कर उजयाला फैला दिया। साथियों बात अगर हम चेटीचंड के दैनिक मुस्लिम भाइयों के प्रिय त्योहार ईद-उल-फितर: आभार करुणा और भाईचारे का संदेश को समझने की करें तो मार्च 2026 में ईद-उल-फितर 20 या 21 मार्च को मनाई जाएगी,जो चांद के दीदार पर निर्भर करती है। यह पर्व रमजान के पवित्र महीने के समापन का प्रतीक है।ईद का दिन अल्लाह के प्रति आभार व्यक्त करने, जरूरतमंदों की मदद करने और सामाजिक भाईचारे को मजबूत करने का अवसर होता है। इस दिन विशेष नमाज अदा की जाती है, “फितरा” (दान) दिया जाता है और लोग एक-दूसरे को गले लगाकर “ईद मुबारक” कहते हैं। सेवइयां और अन्य मिठाइयों का वितरण इस त्योहार की खास पहचान है। यह पर्व हमें सिखाता है कि खुशी तभी पूर्ण होती है जब उसे दूसरों के साथ साझा किया जाए। ईद-उल-फितर भारत की गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक है, जहां विभिन्न धर्मों के लोग एक-दूसरे के त्योहारों में भाग लेते हैं और आपसी प्रेम को बढ़ाते हैं। साथियों बात अगर हम राम नवमी: आदर्श जीवन मूल्यों का उत्सव इसको समझने की करें तो 27 मार्च 2026 को मनाई जाने वाली राम नवमी भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में पूरे भारत में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है। विशेष रूप से अयोध्या में यह उत्सव अत्यंत भव्य होता है,जहां देश- विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं।इस दिन मंदिरों में पूजा-अर्चना, शोभायात्राएं, रथ यात्राएं और भव्य झांकियां आयोजित की जाती हैं।भगवान राम को “मर्यादा पुरुषोत्तम” के रूप में पूजा जाता है, जो सत्य, धर्म और न्याय के प्रतीक हैं।राम नवमी हमें यह संदेश देती है कि आदर्श जीवन जीने के लिए नैतिकता, संयम और कर्तव्य परायणता कितनी आवश्यक है। यह पर्व भारतीय संस्कृति के मूल्यों को सटीक रूप से सुदृढ़ करता है। साथियों बात अगर हम सर्वधर्म समभाव: भारतीय समाज की आत्मा को समझने की करें तो मार्च 2026 का यह सप्ताह भारत के लिए केवल त्योहारों का समय नहीं है, बल्कि यह उसकी आत्मा सर्वधर्म समभाव का उत्सव है। यह वह सिद्धांत है, जो कहता है कि सभी धर्म समान हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए।भारत का संविधान भी धर्मनिरपेक्षता की इसी भावना को अपनाता है, जहां राज्य किसी एक धर्म को प्राथमिकता नहीं देता,बल्कि सभी को समान अवसर और सम्मान प्रदान करता है।जब गुड़ी पड़वा, नवरात्र, चेटी चंद, ईद और राम नवमी जैसे पर्व एक साथ मनाए जाते हैं, तो यह संदेश पूरी दुनिया तक जाता है कि विविधता के बावजूद एकता संभव है। साथियों बात अगर हम एक ही सप्ताह में आए इन सभी त्योहारों के मुद्दे को वैश्विक परिप्रेक्ष्य: मैं समझने की करें तो भारत एक सांस्कृतिक मॉडल है आज जब दुनिया के कई हिस्सों में धार्मिक और सांस्कृतिक संघर्ष देखने को मिलते हैं, तब भारत का यह उदाहरण वैश्विक स्तर पर प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।मार्च 2026 का यह उत्सव अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकता है। दुनिया भर के सैलानी भारत आकर इस विविधता और एकता का अनुभव करना चाहेंगे।यह समय भारत के लिए “सॉफ्ट पावर” को बढ़ाने का भी अवसर है, जहां वह अपनी सांस्कृतिक समृद्धि और सामाजिक समरसता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर सकता है। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि विविधता में एकता की जीवंत अभिव्यक्ति,मार्च 2026 का यह समय भारत के लिए गर्व का क्षण है।यह वह समय है जब विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के लोग अपने-अपनेत्योहार मनाते हुए भी एक-दूसरे के साथ खड़े होते हैं।यह केवल त्योहारों का संगम नहीं है, बल्कि यह मानवता, प्रेम और सह-अस्तित्व का उत्सव है।भारत ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि विविधता उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत है।इस सप्ताह के माध्यम से भारत दुनिया को यह संदेश देता है कि अगर आपसी सम्मान, सहिष्णुता और प्रेम हो, तो विभिन्नताओं के बावजूद एकजुट रहा जा सकता है। यही भारत की असली पहचान है एक ऐसा राष्ट्र, जहां हर धर्म, हर संस्कृति और हर परंपरा को समान सम्मान मिलता है। -संकलनकर्ता लेखक - क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी)