लेख
18-Mar-2026
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चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हिन्दू नव वर्ष यानी नव संवत्सर की शुरुआत होती है। हिन्दू धर्म से जुड़े लोग इस दिन को बहुत खास तरीके से मनाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना शुरू की थी। हर साल इस तिथि पर ब्रह्मांड में नए मंत्रिमंडल का गठन होता है, जिसके आधार पर पूरे साल की गणना की जाती है।हिन्दू नव वर्ष विक्रम संवत 2083 के राजा और मंत्री दोनों ही सूर्य हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 19 मार्च से इस नव संवत्सर की शुरुआत हुई है और इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों मीन राशि में स्थित होंगे। यह नया साल कई राशियों के लिए धन, दौलत और ढेर सारी खुशहाली लेकर आता है लेकिन महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा हिंदू नव वर्ष ज्योतिर्लिंग विशेष धन समृद्धि नव वर्ष पूजा और यज्ञ ऋण-मुक्ति और वर्ष भर समृद्धि और प्रचुरता के लिए मनाया जाता है और हिन्दू के लिए चैत्र नवरात्री की शुरुआत होती है लेकिन फिर 1जनवरी को नया साल क्यों मनाया जाता है सारे कैलेंडर नए साल 1जनवरी से ही चालू होता है नए साल 2082 से शुरुआत होता है ऐ कितने को मालूम है विक्रम संवत आखिर क्या है कैलेंडर आखिर क्या कहता है अंग्रेजी इस कदर हावी क्यों है कि अपना वर्ष भी नहीं समझ पाते हैं विक्रम संवत् आरम्भ करने का कारण था कि कलि के ३०४४ वर्ष में ऋतु चक्र १.५ मास पीछे खिसक गया था। सूर्य सिद्धान्त (३/९-१०) के अनुसार अयनांश का मान २७ अंश से अधिक नहीं होना चाहिये। अतः नया संवत् आरम्भ हुआ जिसमें मास चक्र को १.५ मास पीछे किया गया। फलस्वरूप शुक्ल पक्ष के बदले कृष्ण पक्ष से मास आरम्भ किया गया। किन्तु वर्ष आरम्भ चैत्र शुक्ल पक्ष से रखा तथा अधिक मास गणना की पुरानी पद्धति ही रही।वराहमिहिर ने कुतूहल मञ्जरी में अपनी जन्मतिथि युधिष्ठिर शक ३०४२ चैत्र शुक्ल अष्टमी (८-३-९५ ई.पू.) दी है। कुतूहल मञ्जरी-स्वस्ति श्रीनृप सूर्यसूनुज-शके याते द्वि-वेदा-म्बर-त्रै (३०४२) मानाब्दमिते त्वनेहसि जये वर्षे वसन्तादिके। चैत्रे श्वेतदले शुभे वसुतिथावादित्यदासादभूद् वेदाङ्गे निपुणो वराहमिहिरो विप्रो रवेराशीर्भिः॥बृहत् संहिता के टीकाकार उत्पल भट्ट के अनुसार इनका देहान्त ९० वर्ष की आयु में अर्थात् ५ ई.पू. में हुआ। इसके ८३ वर्ष बाद ७८ ई. में शालिवाहन शक आरम्भ हुआ, जिसका प्रयोग वराहमिहिर द्वारा असम्भव है, जो वर्त्तमान इतिहासकारों की कल्पना है।विक्रम सम्वत् ५७ ई.पू. से-यह सम्वत् है, शक नहीं। पर लोग शक और सम्वत् का अन्तर भूल चुके हैं, अतः इसमें भी गणना की जा रही है। ४२७ वर्ष बाद ४-३-३७१ ई. को २-१३-५४ बजे चैत्र शुक्ल १ आरम्भ हुआ, जिस दिन गुरुवार थाबृहत् संहिता में मकर राशि से सूर्य का उत्तरायण कहा है तथा उसी के अनुसार पञ्च सिद्धान्तिका में योग गणना लिखी है अतः हमें इसका ज्ञान होना जरुरी है.. ईएमएस / 18 मार्च 26