लेख
19-Mar-2026
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर उसके असर का प्रभाव भारत में भी दिखाई देने लगा है। रसोई गैस यानी एलपीजी की मांग अचानक बढ़ने से कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग गईं। लोगों में आशंका और घबराहट के कारण बुकिंग में तेजी आई जिससे आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया। इसी बीच सिलेंडरों की कालाबाजारी और जमाखोरी की खबरों ने सरकार की चिंता और बढ़ा दी। हालात को नियंत्रित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि रसोई गैस जैसी जरूरी वस्तु की आपूर्ति में बाधा डालने वाले किसी भी व्यक्ति या गिरोह को बख्शा नहीं जाएगा। देश के कई हिस्सों में सिलेंडर पाने के लिए लोगों को घंटों लाइन में लगना पड़ा। कुछ स्थानों पर हालात इतने गंभीर हो गए कि दुखद घटनाएं भी सामने आईं। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में सिलेंडर लेने के लिए लाइन में लगे 76 वर्षीय मोहम्मद मुख्तियार की अचानक तबीयत बिगड़ गई और अस्पताल ले जाने से पहले ही उनका निधन हो गया। इसी तरह पंजाब के बरनाला जिले के गांव शैहना में भी सिलेंडर की कतार में खड़े 66 वर्षीय बुजुर्ग भूष्या कुमार मित्तल की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इन घटनाओं ने गैस संकट की गंभीरता को उजागर किया और प्रशासन को आपूर्ति व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त करने की दिशा में कदम उठाने पड़े। सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए कई स्तरों पर कार्रवाई शुरू की है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी की आपूर्ति बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रयास किए जा रहे हैं। भारी मात्रा में एलपीजी लेकर कई बड़े टैंकर भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों के सुरक्षित गुजरने की अनुमति मिलने से भी राहत की उम्मीद बढ़ी है। सरकार का कहना है कि जैसे ही ये जहाज भारत पहुंचेंगे गैस की उपलब्धता में तेजी से सुधार होगा और बाजार में दबाव कम होगा। इसी बीच सरकार ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों पर लगी अस्थायी रोक भी हटा दी है। कुछ दिनों पहले घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति रोक दी गई थी। अब जब स्थिति थोड़ी संतुलित होती दिखाई दे रही है तो होटल रेस्टोरेंट और उद्योगों के लिए कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई फिर से शुरू कर दी गई है। दिल्ली एनसीआर समेत कई औद्योगिक क्षेत्रों में गैस की मांग को देखते हुए यह फैसला लिया गया ताकि उद्योग और सेवा क्षेत्र की गतिविधियां भी प्रभावित न हों। मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि देश के 29 राज्यों और लगभग एक लाख से अधिक रिटेल आउटलेट्स पर ईंधन की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है। पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे पैनिक बुकिंग से बचें और जरूरत से ज्यादा गैस या ईंधन जमा करने की कोशिश न करें क्योंकि इससे अनावश्यक संकट की स्थिति पैदा हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि सामान्य दिनों में जहां प्रतिदिन लगभग 50 से 52 लाख एलपीजी बुकिंग होती हैं वहीं हाल के दिनों में यह संख्या बढ़कर करीब 75 लाख तक पहुंच गई है। जमाखोरी और कालाबाजारी पर लगाम लगाने के लिए देशभर में व्यापक स्तर पर छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में लगभग 1400 स्थानों पर छापे मारे गए हैं जहां अवैध रूप से गैस सिलेंडर जमा किए गए थे। मध्य प्रदेश के भोपाल में एक बंद पड़ी गैस एजेंसी से 600 से अधिक सिलेंडर बरामद किए गए। छत्तीसगढ़ में भी 700 से ज्यादा सिलेंडर अवैध भंडारण में मिले जबकि कर्नाटक में चोरी के 500 से अधिक सिलेंडर जब्त किए गए। इन कार्रवाइयों से यह स्पष्ट हो गया है कि संकट के समय कुछ लोग मुनाफाखोरी के लिए जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी करने से भी नहीं चूकते। गुजरात में भी प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। सूरत में आयोजित क्षेत्रीय क्राइम कॉन्फ्रेंस में राज्य के पुलिस महानिदेशक ने गैस सिलेंडरों की जमाखोरी और अवैध कारोबार पर कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। पुलिस अधिकारियों को गैस एजेंसियों गोदामों और सप्लाई चेन पर विशेष निगरानी रखने के लिए कहा गया है। अधिकारियों का कहना है कि गैस से भरे ट्रकों और टेम्पो को एजेंसियों तक समय पर पहुंचाने के लिए ट्रैफिक प्रबंधन को भी मजबूत किया जाएगा ताकि वितरण व्यवस्था में किसी प्रकार की रुकावट न आए। बैठक में यह भी तय किया गया कि औद्योगिक क्षेत्रों और घनी आबादी वाले इलाकों में गैस की मांग को देखते हुए पुलिस और प्रशासन विशेष सतर्कता बरतेंगे। अवैध रिफिलिंग चोरी और जमाखोरी के मामलों में तुरंत कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने साफ कहा है कि आवश्यक वस्तुओं के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी प्रावधान लागू किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य केवल अपराधियों को पकड़ना नहीं बल्कि आम नागरिकों तक आवश्यक वस्तुओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करना भी है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने सुरक्षा को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। लोगों से कहा गया है कि पेट्रोल या डीजल को ढीले या अनुपयुक्त कंटेनरों में भरकर घरों में जमा न करें क्योंकि इससे बड़ा सुरक्षा खतरा पैदा हो सकता है। हाल ही में तमिलनाडु के एक पेट्रोल पंप पर ढीले कंटेनर में पेट्रोल भरते हुए पाया गया जिसके बाद उस पंप को निलंबित कर दिया गया और उसके खिलाफ कार्रवाई की गई। मंत्रालय ने सभी डीलरों और पेट्रोल पंप संचालकों को ईंधन वितरण के दौरान सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है लेकिन समय रहते उठाए गए प्रशासनिक कदम स्थिति को नियंत्रण में रखने में मदद करते हैं। भारत जैसे बड़े देश में ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखना बड़ी चुनौती है लेकिन मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और रणनीतिक योजना के जरिए सरकार इस चुनौती से निपटने का प्रयास कर रही है। सरकार का कहना है कि आने वाले दिनों में एलपीजी के और जहाज भारत पहुंचेंगे जिससे बाजार में गैस की उपलब्धता बढ़ेगी और कतारों की स्थिति धीरे धीरे खत्म हो जाएगी। प्रशासनिक सख्ती और लगातार छापेमारी से कालाबाजारी करने वाले तत्वों पर भी अंकुश लगेगा। यदि आम नागरिक भी संयम बनाए रखें और जरूरत से ज्यादा गैस जमा करने से बचें तो स्थिति जल्द ही सामान्य हो सकती है। गैस संकट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति व्यवस्था में पारदर्शिता और सतर्क निगरानी कितनी जरूरी है। सरकार के सख्त कदमों से उम्मीद की जा रही है कि जमाखोरी पर लगाम लगेगी और देशभर में रसोई गैस की सप्लाई जल्द ही पूरी तरह सामान्य हो जाएगी। इससे लाखों परिवारों को राहत मिलेगी और घरेलू रसोई का चूल्हा बिना किसी रुकावट के जलता रहेगा। (वरिष्ठ पत्रकार साहित्यकार) (यह लेखक के व्य‎‎‎क्तिगत ‎विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अ‎निवार्य नहीं है) .../ 19 मार्च /2026