कोरबा (ईएमएस) कोरबा जिलान्तर्गत कुदुरमाल पुल के जर्जर होने और लोड टेस्टिंग का भार सहने की क्षमता नहीं होने से सेतू निगम ने फेल घोषित करते हुए वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी है। लेकिन समय व ईंधन बचाने शाम से लेकर सुबह तक भारी वाहन वैकल्पिक मार्ग के बजाए कुदुरमाल पुल से होकर आवाजाही कर रहे हैं। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। उरगा-बलौदा मार्ग पर कुदुरमाल के पास हसदेव नदी पर बना पुल 5 दशक पुराना होने और अत्याधिक भार क्षमता के मालवाहकों के आवाजाही के कारण जर्जर हालत में पहुंच गया है। पुल के मध्य के हिस्से में स्लैब नीचे बैठ गया है। ऐसे में खतरे को देखते हुए 3 माह पहले पुल पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित कर दी थी। पीडब्ल्यूडी के सेतू निगम के निरीक्षण में पुल की जर्जर हालत को देखते हुए उसे लोड टेस्टिंग का भार सहने की क्षमता योग्य नहीं माना गया। इसके बाद पुल पर वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगाते हुए दोनों छोर पर मिट्टी डालने के साथ ही बैरिकैड्स लगाया था, लेकिन बैरिकेड्स के साथ ही मिट्टी के ढेर को हटाकर वाहनों की आवाजाही के लिए रास्ता बना दिया है। अब शाम से लेकर सुबह तक भारी वाहन कुदुरमाल पुल से होकर कुसमुंडा व बलौदा की ओर से उरगा की ओर आवाजाही कर रहे हैं। प्रतिबंध के बाद भी गुजर रहे मालवाहकों को रोकने न कोई व्यवस्था की गई है और ना ही ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। वहीं पुल से दोपहिया व चार पहिया में आमजन भी आवाजाही कर रहे हैं। ऐसे में यातायात के दबाव के कारण पुल पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। कुदुरमाल पुल पर आवाजाही पर रोक लगने के बाद गेवरा-दीपका व कुसमुंडा क्षेत्र से उरगा होते चांपा, हाटी, रायगढ़ की ओर आवाजाही करने वाले भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गो से होकर आवाजाही करना पड़ रहा है। दिनभर जहां भारी वाहन बालकोनगर से होते हुए गुजरते हैं तो रात में नो एंट्री खुलने के बाद शहर के भीतर ट्रांसपोर्ट नगर से होते हुए मुड़ापार बायपास से आवाजाही करते हैं, लेकिन वैकल्पिक मार्गों पर दूरी अधिक होने से ज्यादा ईंधन लगता है और नो एंट्री व जाम की स्थिति के कारण समय अधिक लगता है, इसलिए ज्यादातर चालक समय व ईंधन बचाने के लिए रिस्क होने के बाद भी शॉर्टकट रास्ता अपनाते हुए कुदुरमाल पुल से गुजरते हैं। 19 मार्च / मित्तल