- सम्राट विक्रमादित्य पर नाट्य प्रस्तुति ने बांधा समां मुरैना ( ईएमएस ) | भारतीय संस्कृति और परंपरा के गौरवशाली प्रतीक विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत सृष्टि आरंभ दिवस (वर्ष प्रतिपदा) एवं विक्रम संवत् 2083 के शुभारंभ अवसर पर “कोटि सूर्योपासना” का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर धार्मिक, सांस्कृतिक और नाट्य गतिविधियों के माध्यम से भारतीय परंपराओं का जीवंत उत्सव प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने किया। इस दौरान महापौर श्रीमती शारदा सोलंकी, समाजसेवी कमलेश कुशवाह, सीईओ जिला पंचायत कमलेश कुमार भार्गव, सभापति राधारमण डंडोतिया, अपर कलेक्टर अश्विनी कुमार रावत, एसडीएम बीएस कुशवाह सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, विद्यार्थी और कला प्रेमियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “सम्राट विक्रमादित्य” पर आधारित विशेष नाट्य प्रस्तुति रही, जिसका मंचन वीमेंस नाट्य संस्था, ग्वालियर द्वारा किया गया। प्रसिद्ध रंगकर्मी गीतांजलि गिरवाल के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक में कलाकारों ने सम्राट विक्रमादित्य के जीवन, उनकी न्यायप्रियता और सांस्कृतिक योगदान को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से मंचित किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। संगीत संयोजन अभिषेक त्रिपाठी द्वारा किया गया, जबकि लेखन एवं सह-निर्देशन की जिम्मेदारी प्रसन्न सोनी ने निभाई। संजय श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में यह प्रस्तुति साकार हुई। मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय, भोपाल के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम ने अपनी उच्च गुणवत्ता से दर्शकों को प्रभावित किया। आयोजन का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, परंपरा और ऐतिहासिक धरोहर को जन-जन तक पहुँचाना तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना रहा। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ किया, बल्कि भारतीय नववर्ष के महत्व को भी रेखांकित किया। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और कलाकारों का माल्यार्पण कर सम्मान किया गया तथा भविष्य में ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया गया। अपने संबोधन में कलेक्टर श्री लोकेश कुमार जांगिड़ ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य की वीरता और राष्ट्र गौरव की पुनर्स्थापना भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है, जो हमें आज भी ऊर्जा और आत्मविश्वास प्रदान करता है। उन्होंने विक्रम संवत् की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल एक कालगणना नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, विज्ञान और जीवन पद्धति का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने बताया कि विक्रम संवत् का आरंभ 57 ईसा पूर्व सम्राट विक्रमादित्य द्वारा शकों पर विजय के उपलक्ष्य में किया गया था और आज भी देश के अधिकांश तीज-त्योहार, संस्कार और ज्योतिषीय गणनाएं इसी के आधार पर होती हैं। यह संवत् भारतीय समाज में व्यापक रूप से स्वीकृत और प्रचलित है। कलेक्टर ने कहा कि विक्रम संवत् भारतीय सांस्कृतिक पहचान का आधार है और इसे अपनाने से राष्ट्रीय एकता, आत्मगौरव और सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा मिलेगी।