- कलेक्टर ने श्रमदान कर दिया जल संरक्षण का संदेश मुरैना ( ईएमएस ) । वर्ष प्रतिपदा के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ मोहनयादव के कुशल नेतृत्व में संपूर्ण प्रदेश के साथ मुरैना जिले में भी ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का विधिवत शुभारंभ किया गया। मुरैना जनपद पंचायत के ग्राम धनेला स्थित जीवाराम का पुरा में तालाब गहरीकरण कार्य के साथ इस अभियान की शुरुआत हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने स्वयं श्रमदान कर किया। इस अवसर पर सीईओ जिला पंचायत श्री कमलेश कुमार भार्गव, अपर कलेक्टर अश्विनी कुमार रावत, जिला पंचायत सदस्य केशव सिंह, ग्राम पंचायत सरपंच श्रीमती मुन्नी देवी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। कलेक्टर श्री जांगिड़ ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री जी की मंशा है—“गांव का पानी गांव में और खेत का पानी खेत में रोक कर संरक्षित किया जाए।” इसी उद्देश्य से 19 मार्च से 30 जून 2026 तक प्रदेशभर में जल गंगा संवर्धन अभियान संचालित किया जा रहा है। उन्होंने जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आज जल बचाने के प्रयास ही भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षित जल उपलब्ध करा सकेंगे। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक उत्साह के साथ कलश यात्रा निकाली तथा तालाब गहरीकरण कार्य का विधिवत भूमिपूजन किया गया। कलेक्टर सहित अन्य अतिथियों ने श्रमदान किया और जनसहभागिता का संदेश दिया। कलेक्टर ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य नदियों, प्राचीन जल संरचनाओं एवं अन्य जल स्रोतों का संरक्षण और पुनर्जीवन सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि यह अभियान “जनसहभागिता से जल संरक्षण” की भावना पर आधारित है, जिसमें नए जल संग्रहण ढांचे विकसित करने के साथ-साथ पुराने जल स्रोतों का जीर्णोद्धार, सफाई और आसपास पौधरोपण को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि यह अभियान जनआंदोलन का रूप ले सके। सीईओ जिला पंचायत ने जानकारी दी कि मनरेगा योजना के अंतर्गत वर्ष 2019 में निर्मित तालाब के गहरीकरण कार्य की शुरुआत जनभागीदारी से की गई है। इस कार्य के पूर्ण होने पर तालाब की जलग्रहण क्षमता 12,000 घनमीटर से बढ़ाकर 16,000 घनमीटर करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे क्षेत्र में जल संरक्षण को मजबूती मिलेगी तथा आसपास के लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयास न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा देंगे, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि उत्पादन और जल उपलब्धता में भी सकारात्मक परिवर्तन लाएंगे। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने ग्रामीणजनों से जल संरक्षण में निरंतर सहभागिता बनाए रखने का आह्वान किया।