- राजधानी के सबसे बड़े हमीदिया अस्पताल में लापरवाही का दावा - शव लेने एनआईसीयू पहुंचे नवजात के पिता को बच्ची की सांसे चलती नजर आई, पेट भी हिलता नजर आया - पिता ने बनाया वीडियो, परिजन और स्टॉफ के बीच बनी विवाद की स्थिति भोपाल(ईएमएस)। राजधानी भोपाल के हमीदिया के कमला नेहरू हॉस्पिटल में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां डॉक्टरों ने एक नवजात बच्ची को मृत घोषित कर परिजनों को सौंप दिया। लेकिन पिता का दावा है की करीब 4 घंटे बाद बच्ची की सांसे चलती नजर आई। वहीं अस्पताल के डॉक्टरो ने परिवार को बच्ची का मृत्यु प्रमाण पत्र तक जारी कर दिया था। परिजन कफन खरीदकर अंतिम संस्कार की तैयारी कर चुके थे। इसी दौरान बच्ची में हलचल देखी गई, जिसके बाद हड़कंप मच गया। परिजन अब जिम्मेदार डॉक्टरों और स्टाफ पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। नवजात के पिता परवेज ने बताया कि वो बरेली का रहने वाला है। पत्नी की प्रग्नेंट थी। परवेज अपनी गर्भवती पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर पहले नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले गए। वहां से उन्हें रायसेन जिला अस्पताल और बाद में हमीदिया अस्पताल के स्त्री रोग विभाग रेफर किया गया। हम उसे भोपाल अस्पताल में ले आए। बुधवार 18 मार्च को शाम साढ़े सात बजे डिलेवरी हुई और सवा आठ बजे बच्ची का डेथ सर्टीफिकेट दे दिया। इसके बाद चार घंटे बाद बच्ची की सांसें आ गई। बच्ची आईसीयू में भर्ती है। परवेज का कहना है की प्रिमैच्योर, छह महीने की बच्ची हुई है। परिजनों का कहना है की वह लेबर रूम के बाहर थे। उनके सामने डिलेवरी हुई और डिलेवरी होने से पहले ही डॉक्टर ने बोल दिया था, कि बच्चे की जान खतरे में है। डिलेवरी होने पर डॉक्टर्स ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया और डेथ सर्टीफिकेट भी दे दिया और परिार वालो के साइन भी ले लिए। - पिता रात में एनआईसीयू पहुंचे तो बच्ची के शरीर में हरकत नजर आई पिता परवेज का कहना है कि रात करीब 12 बजे मृत्यु प्रमाण पत्र भी दे दिया गया, जिसमें मृत्यु का समय शाम करीब 8.30 बजे दर्ज था। इस दौरान परिवार कागजी प्रक्रिया और महिला की देखभाल में उलझा रहा। जब पिता परवेज रात में एनआईसीयू पहुंचे और बच्ची को देखा तो उसकी सांसें चल रही थीं। उन्होंने इसका वीडियो भी बनाया, जिसमें बच्ची का पेट हिलता हुआ नजर आ रहा है। इसके बाद उन्होंने मौके पर मौजूद डॉक्टरों से सवाल किए। परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने इस बारे में डॉक्टरों से जवाब मांगा तो स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। साथ ही वीडियो बनाने से रोकने की कोशिश और धक्का-मुक्की तक की गई। फिलहाल विभाग के वरिष्ठ डॉक्टरों ने ड्यूटी डॉक्टरों से पूरे मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। डॉक्टरों का मानना है कि नवजात को पर्याप्त समय तक ऑब्जर्वेशन में नहीं रखा गया। कम से कम कुछ घंटे निगरानी में रखने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट करना चाहिए थी। जल्दबाजी में दी गई जानकारी से भ्रम की स्थिति बनी। - समय से पहले जन्में नवजात में हार्ट बीट नहीं मिली थी वहीं डॉक्टरों का यह भी कहना है, कि वह समय से पहले जन्मा नवजात अत्यंत कम वजन का था, जिसमें प्रारंभिक जांच में हार्टबीट नहीं मिली, उसके अंग पूरी तरह विकसित नहीं हुए थे। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में कभी-कभी शरीर में हलचल देखी जा सकती है, लेकिन जीवित रहने की संभावना बेहद कम होती है। ऐसे मामलों में कभी-कभी जन्म के बाद कुछ समय के लिए हलचल दिखाई दे सकती है, लेकिन जीवित रहने की संभावना कम होती है। जुनेद / 19 मार्च