- पुलिस ने जेल से निकलते ही फिर से दबोचा, रासुका की कार्यवाही का अनुमान-सूत्र भोपाल(ईएमएस)। नगर निगम के स्लॉटर हाउस में गोमांस तस्करी करने के मामले में मुख्य आरोपी असमल चमड़ा जमानत मिलते ही गायब है। एक और जहॉ चर्चा है की परिजनो ने उसे छिपा दिया है, वहीं परिजनो ने पुलिस पर ही उसे दोबारा पकड़ने का आरोप लगाया है। हालांकि खबर लिखे जाने तक पुलिस अफसरों ने उसकी किसी भी तरह की गिरफ्तारी से इंकार किया है। सूत्रों की मानें तो असलम कुरैशी उर्फ चमड़ा को जमानत मिलने के बाद बुधवार रात उसकी रिहाई हो गई। जेल से रिहाई के बाद बाहर निकलते ही असलम को दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया है। उस पर धारा 151 के तहत कार्रवाई जोन-4 के एक थाना पुलिस ने की है। अब पुलिस उसके खिलाफ रासुका प्रतिवेदन पेश करने की तैयारी कर रही है। गौरतलब है कि करीब 70 दिन बाद एडीजे पंकज कुमार जैन की अदालत ने असलम को 35 हजार रुपए के मुचलके पर जमानत देने के आदेश दिए थे। हालांकि, देर शाम भोपाल सेंट्रल जेल से रिहाई के बाद से असलम गायब है। परिजन पुलिस पर ही असलम को फिर से पकड़ने का आरोप लगा रहे है। - जेल के मेन गेट से ही पुलिस टीम ने दबोचा सुत्र बताते है की बुधवार रात करीब 10 बजे भोपाल सेंट्रल जेल के मेन गेट से असलम के बाहर निकलते ही पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार किया था। एक कार से उसे जेल परिसर से बाहर निकाला गया। इस कार का एक वीडियो भी सामने आया है। पहले उसे परवलिया सड़क फिर सीहोर रोड ले जाया गया। इसके बाद देर रात उसे थाने लेकर पहुंची पुलिस ने टीम ने कार्रवाई की। - 70 दिन बाद जमानत मिलने पर आया था बाहर असलम उर्फ चमड़ा को करीब जेल भेजने के 70 दिन बाद एडीजे पंकज कुमार जैन की अदालत ने 35 हजार रुपए के मुचलके पर रिहा करने के आदेश दिए। हालांकि, देर रात भोपाल सेंट्रल जेल से रिहाई के बाद से असलम गायब है। असलम के भाई आसिफ के अनुसार वे असलम को लेने जेल पहुंचे थे, लेकिन उन्हें उससे मिलने तक नहीं दिया गया। - जमानत आदेश में कोर्ट ने यह कहा अदालत ने बुधवार को अपने आदेश में कहा कि संबंधित अपराध न तो मृत्युदंड और न ही आजीवन कारावास से दंडनीय है और यह न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। आरोपी दो माह से अधिक समय से अभिरक्षा में है, जबकि मामले की विवेचना पूरी हो चुकी है और चार्जशीट भी प्रस्तुत की जा चुकी है। ऐसे में ट्रायल पूरा होने में समय लगने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए जमानत देना उचित है। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपी का यह दूसरा जमानत आवेदन था। परिस्थितियों में बदलाव और जांच पूरी होने के बाद जमानत दी गई। साथ ही शर्त रखी गई है कि आरोपी ट्रायल में कोई बाधा नहीं डालेगा और बिना अनुमति देश से बाहर नहीं जाएगा। - इन शर्तों पर बाहर आया असलम असलम की तरफ से वकील विजय चौधरी और जगदीश गुप्ता ने कोर्ट में पक्ष रखा। कोर्ट ने जमानत देते हुए कुछ शर्तें भी रखी हैं। वह केस की सुनवाई में कोई रुकावट नहीं डालेगा। बिना कोर्ट की इजाजत के वह देश छोड़कर बाहर नहीं जा सकेगा। सुनवाई के दौरान वह बार-बार तारीखें आगे बढ़ाने (स्थगन) की मांग नहीं करेगा। - क्या था नगर निगम के स्लॉस्टर हाउस में गौकशी का मामला 17 दिसंबर की रात हिंदू संगठनों ने पुलिस कंट्रोल रूम के पास एक कंटेनर पकड़ा था, जो जिंसी स्लॉटर हाउस से निकला था। इसमें 26 टन मांस भरा था। जब इस मांस के सैंपल मथुरा की लैब भेजे गए, तो वहां से आई रिपोर्ट में इसमें गोमांस होने की बात सामने आई। रिपोर्ट आने के बाद 8 जनवरी 2026 को जहांगीराबाद पुलिस ने केस दर्ज कर असलम और ड्राइवर शोएब को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। - बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने निकाली निगम-पुलिस की अर्थी असलम चमड़ा को जमानत मिलने के विरोध में बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय के सामने आक्रोश जताते हुए नगर निगम और पुलिस प्रशासन की सांकेतिक अर्थी निकाली और पुतला दहन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि इतने गंभीर मामले में आरोपी को जमानत मिलना न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। पुलिस की खामियों के कारण ही असलम को कोर्ट से राहत मिली। लेकिन असलम पर रासुका की कार्रवाई नहीं की गई तो समस्त हिंदू संगठनों के साथ सड़कों पर उतरेंगे और अलग-अलग इलाकों में प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन पर भी लापरवाही का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि यदि मामले में कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो समस्त हिंदू संगठन एक साथ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेगें। जुनेद / 19 मार्च