राष्ट्रीय
20-Mar-2026
...


नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारतीय रेल में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के परिणाम अब साफ नजर आने लगे हैं। बीते एक दशक में रेल हादसों और उनसे होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता जानकारी देते हुए बताया कि 10 वर्षों में 60 फीसदी हादसे कम हुए हैं, जाहिर इससे असामयिक मौतों में 17 फीसदी गिरावट दर्ज की गई है। सरकार के लिए जहां ये राहत भरी खबर है वहीं रेल यात्रियों के लिए भी खुशी का पैगाम है। 2014-15 में जहां 135 ट्रेन हादसे हुए थे, वहीं 2025-26 (फरवरी तक) यह संख्या घटकर 14 रह गई, यानी करीब 90 फीसदी की कमी। वहीं, पिछले दशक (2014-15 से 2023-24) में, कुल 678 हादसे हुए। उसमें 748 लोगों की मौत हुई थी और 2 हजार 87 यात्री घायल हुए थे। वर्ष 2004-05 से 2013-14 के बीच कुल 1 हजार 711 रेल हादसे हुए उनमें मौतों की संख्या 904 दर्ज की गई थी। जबकि 3 हजार 155 यात्री घायल हुए थे। उक्त अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2024-25 में सुरक्षित रेल यात्रा के लिए रेलमंत्री अश्वनी वैष्णव द्वारा लगातार उठाए गए कदमों का परिणाम है कि रेल हादसों की संख्या 31 पर सिमट गई। जबकि केवल 18 मौतें दर्ज की गई और 92 यात्री घायल हुए। उन्होंने कहा, दुर्घटनाएं न हों। यात्री हताहत न हों इसकी लगातार कोशिशें जारी हैं। उन्होंने कहा यही वजह है कि वर्ष 2025-26 (फरवरी तक) महज14 रेल हादसे हुए। उनमें 16 मौतें, 28 घायल के आंकड़े हैं। कवच प्रणाली का विस्तार रेलवे ने स्वदेशी ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम कवच को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाया है। जुलाई 2020 में इसे लागू किया गया। 2024 में इसका उन्नत संस्करण 4.0 मंजूर हुआ। अब तक 1,452 रूट किलोमीटर पर इसे लागू किया जा चुका है। यह सिस्टम खासतौर पर हाई-डेंसिटी रूट पर लागू हुआ है। उनमें दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-हावड़ा जैसे रूट शामिल हैं। इससे कोशिश है कि ट्रेन टकराव जैसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके। सरकार का कहना है कि बढ़ते निवेश और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से रेलवे सुरक्षा में लगातार सुधार हो रहा है। आने वाले वर्षों में हादसों को और कम करने के लिए इन उपायों को और व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा। वीरेंद्र/ईएमएस/20मार्च2026