राष्ट्रीय
20-Mar-2026
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नईदिल्ली (ईएमएस) । केंद्र सरकार ने शहरों की व्यवस्था सुधारने के लिए पिछले 11 साल में 8।36 लाख करोड रुपए खर्च किए हैं। इतने भारी भरकम खर्च के बाद भी शहरों की हालत सुधरने की स्थान पर हर साल खराब होती जा रही है। जनाग्रह की शेपिंग अर्बन इंडिया बाय डिजाइन,नाब बाय डिफ़ॉल्ट की रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले 18 सालों में शहरी क्षेत्र का एरिया 25 लाख हेक्टेयर बढा है। शहरों का विकास अनियंत्रित तरीके से हुआ है। जिसके कारण शहरों में रहना पहले की तुलना में और भी मुश्किल हो गया है। अधिकांश शहरों में वायु प्रदूषण, जल भराव और ड्रेनेज सिस्टम रोड़ों को लेकर स्थितियां बेहद खराब हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार सभी शहरों के लिए एक जैसे विकास मॉडल तैयार किये जा रहे हैं।11 साल में शहरों में 8.36 लाख करोड़ खर्च, इसके बाद भी शहरों की हालत बदहाल नईदिल्ली (ईएमएस) । केंद्र सरकार ने शहरों की व्यवस्था सुधारने के लिए पिछले 11 साल में 8।36 लाख करोड रुपए खर्च किए हैं। इतने भारी भरकम खर्च के बाद भी शहरों की हालत सुधरने की स्थान पर हर साल खराब होती जा रही है। जनाग्रह की शेपिंग अर्बन इंडिया बाय डिजाइन,नाब बाय डिफ़ॉल्ट की रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले 18 सालों में शहरी क्षेत्र का एरिया 25 लाख हेक्टेयर बढा है। शहरों का विकास अनियंत्रित तरीके से हुआ है। जिसके कारण शहरों में रहना पहले की तुलना में और भी मुश्किल हो गया है। अधिकांश शहरों में वायु प्रदूषण, जल भराव और ड्रेनेज सिस्टम रोड़ों को लेकर स्थितियां बेहद खराब हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार सभी शहरों के लिए एक जैसे विकास मॉडल तैयार किये जा रहे हैं। विकास मॉडल तैयार करने वाली संस्था के पास विकास का डाटा उपलब्ध नहीं है। इसलिए शहरों के विकास सही तरीके से नहीं हो पा रहे हैं। यह रिपोर्ट नीति आयोग के सदस्य राजीव गोवा तथा शहरी मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव डी धारा तथा भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या की उपस्थिति में रिपोर्ट जारी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में वायु प्रदूषण, मुंबई में आवास संकट, बेंगलुरु में ट्रैफिक जाम की समस्या, कोलकाता में घटती हरियाली, जयपुर में बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं, इंदौर में दूषित पानी, झांसी में जर्जर बुनियादी ढांचा का उल्लेख रिपोर्ट में विशेष रूप से किया गया है। जो रिपोर्ट जारी की गई है।उसके अनुसार शहरी सुधार के लिए आवश्यक सुझाव दिए गए हैं। जिसमें सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता, छोटे और मध्यम शहरों के लिए अलग मॉडल तैयार किए जाने की अनुशंसा की गई है। पिछले वर्षों में शहरी विकास का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव जल भराव के रूप में देखने को मिला है। हर शहर में थोड़ी सी बारिश होने पर पानी की निकासी नहीं हो पाती है। एक बड़ी आबादी को बाढ़ जैसी आपदा से जूझना पड़ता है। इतनी भारी राशि खर्च होने के बाद भी शहरों के विकास के लिए जो कार्य होना था वह नहीं हुआ। इस बात की चिंता रिपोर्ट में जताई गई है। एस जे/20मार्च2026 विकास मॉडल तैयार करने वाली संस्था के पास विकास का डाटा उपलब्ध नहीं है। इसलिए शहरों के विकास सही तरीके से नहीं हो पा रहे हैं। यह रिपोर्ट नीति आयोग के सदस्य राजीव गोवा तथा शहरी मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव डी धारा तथा भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या की उपस्थिति में रिपोर्ट जारी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में वायु प्रदूषण, मुंबई में आवास संकट, बेंगलुरु में ट्रैफिक जाम की समस्या, कोलकाता में घटती हरियाली, जयपुर में बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं, इंदौर में दूषित पानी, झांसी में जर्जर बुनियादी ढांचा का उल्लेख रिपोर्ट में विशेष रूप से किया गया है। जो रिपोर्ट जारी की गई है।उसके अनुसार शहरी सुधार के लिए आवश्यक सुझाव दिए गए हैं। जिसमें सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता, छोटे और मध्यम शहरों के लिए अलग मॉडल तैयार किए जाने की अनुशंसा की गई है। पिछले वर्षों में शहरी विकास का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव जल भराव के रूप में देखने को मिला है। हर शहर में थोड़ी सी बारिश होने पर पानी की निकासी नहीं हो पाती है। एक बड़ी आबादी को बाढ़ जैसी आपदा से जूझना पड़ता है। इतनी भारी राशि खर्च होने के बाद भी शहरों के विकास के लिए जो कार्य होना था वह नहीं हुआ। इस बात की चिंता रिपोर्ट में जताई गई है।