क्षेत्रीय
20-Mar-2026
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- जल जीवन मिशन 2.0 के तहत महत्वपूर्ण एमओयू - केन्द्र-राज्य साझेदारी मजबूत, 2028 तक सुदृढ़, सतत और गुणवत्तापूर्ण पेयजल आपूर्ति का लक्ष्य गांधीनगर (ईएमएस)| मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित एवं पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल तथा केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की उपस्थिति में शुक्रवार को राज्य सरकार तथा केन्द्र सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के बीच जल जीवन मिशन 2.0 अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की सुविधा सुलभ बनाने के लिए महत्वपूर्ण एमओयू हुआ है। इस कार्यक्रम में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री पाटिल तथा राज्य के जलापूर्ति मंत्री ईश्वरसिंह पटेल वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सहभागी हुए। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि राज्य के सुदूरवर्ती-दूरदराजी क्षेत्रों सहित हर कोने तक पर्याप्त स्वच्छ पेयजल पहुँचाने के लिए राज्य सरकार कटिबद्ध है। उन्होंने जोड़ा कि सरकार द्वारा किया गया यह एमओयू राज्य के पेयजल प्रबंधन एवं ग्रामीण जनजीवन के गुणात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पटेल ने आगे कहा कि राज्य सरकार केन्द्र की हर योजना का प्राथमिकता के आधार पर सफल क्रियान्वयन करती है। जल जीवन मिशन 2.0 अंतर्गत हुआ यह एमओयू राज्य के ग्रामीण विकास में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा। हर घर में स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल पहुँचाने का संकल्प अब और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ेगा। जल जीवन मिशन की शुरुआत 15 अगस्त, 2019 को ‘हर घर जल’ के संकल्प के साथ की गई थी, जिसमें प्रत्येक ग्रामीण घर में नल से पीने का पानी पहुँचाने का उद्देश्य रखा गया था। गुजरात ने यह लक्ष्य अक्टूबर, 2022 तक सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है, जो राज्य के लिए गौरव की बात है। अब जल जीवन मिशन 2.0 अंतर्गत 2028 तक जलापूर्ति व्यवस्था का अधिक सुदृढ़ीकरण, नियमितता तथा सस्टेनेबिलिटी सुनिश्चित करने का मुख्य उद्देश्य रखा गया है। इस एमओयू द्वारा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, निगरानी तथा पारदर्शिता में वृद्धि होगी। इस एमओयू के अनुसार राज्य के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में निरंतर-निर्बाध एवं गुणवत्तायुक्त जलापूर्ति सुनिश्चित की जाएगी तथा ‘हर घर जल’ प्रमाणपत्र प्राप्त करने के प्रयास अधिक वेगवान बनेंगे। एमओयू अंतर्गत जलापूर्ति योजनाओं को समय पर तथा गुणवत्तापूर्वक पूर्ण कर ग्राम पंचायतों को सौंपने, संचालन एवं रखरखाव (ओएण्डएम) सुनिश्चित करने, ग्रामीण स्तर पर विलेज वॉटर एंड सेनिटेशन समिति (वीडब्लूएससी) द्वारा जल प्रबंधन का संचालन करने, जल स्रोतों की दीर्घकालीन सुरक्षा करने और सस्टेनेबिलिटी पर बल देने जैसे विषय शामिल हैं। इसके अतिरिक्त; डिजिटल मॉनिटरिंग के लिए ‘सुजलम भारत’ तथा ‘पीएम गति शक्ति’ जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग कर पारदर्शिता बढ़ाई जाएगी। पानी की गुणवत्ता का निरीक्षण, वित्तीय अनुशासन, ‘नल से जल मित्र’ जैसी पहलों के माध्यम से मानव संसाधन विकास एवं जल संरक्षण के लिए ‘जल उत्सव’ जैसे अभियान भी इस मिशन का अभिन्न हिस्सा रहेंगे। इस एमओयू के अंतर्गत केन्द्र एवं राज्य सरकारों की जिम्मेदारियाँ भी स्पष्ट की गई हैं। केन्द्र सरकार मार्गदर्शन, फंडिंग तथा मॉनिटरिंग करेगी; जबकि राज्य सरकार क्रियान्वयन, नीति सुधार तथा टेक्निकल सपोर्ट की जिम्मेदारी निभाएगी। इस अवसर पर केन्द्र सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक मीणा वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सहभागी हुए, जबकि राज्य सरकार की ओर से कार्यक्रम में जलापूर्ति विभाग की प्रधान सचिव शाहमीना हुसैन, जलापूर्ति विभाग के मुख्य अभियंता नीरव सोलंकी, धरा व्यास तथा भाविक राठौड़ उपस्थित रहे। सतीश/20 मार्च