नई दिल्ली (ईएमएस)। पटियाला हाउस कोर्ट ने यूएपीए मामले में दो आरोपियों, जमशेद जहूर पॉल और परवेज रशीद को सात साल से अधिक जेल में बिताने के बाद बरी कर दिया। अदालत ने अभियोजन पक्ष को आरोप साबित करने में विफल पाया और जांच में गंभीर खामियां उजागर कीं। पटियाला हाउस स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज मामले में दो आरोपितों को बरी कर दिया है। दोनों सात वर्ष से अधिक समय जेल में काट चुके हैं। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा और जांच में गंभीर खामियां पाई गईं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित बंसल ने जमशेद जहूर पॉल और परवेज रशीद को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। दोनों पर आतंकी संगठन से जुड़ाव, साजिश रचने और शस्त्र अधिनियम के तहत अवैध हथियार रखने के आरोप लगाए गए थे। सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन की कहानी पर कई गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि जब्त किए गए दस्तावेज पर पहले से प्राथमिकी नंबर दर्ज होना इस बात की ओर इशारा करता है कि या तो प्राथमिकी पहले दर्ज की गई या बाद में नंबर डाला गया दोनों ही स्थितियों में बरामदगी की कहानी संदिग्ध हो जाती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि बरामदगी एक भीड़-भाड़ वाली जगह बस स्टाप और मेट्रो स्टेशन पर हुई बताई गई, जहां सार्वजनिक गवाह मौजूद थे, लेकिन पुलिस ने किसी स्वतंत्र गवाह को जांच में शामिल नहीं किया। इस पर कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। इलेक्ट्राॅनिक सुबूतों को लेकर भी अदालत ने कड़ी टिप्पणी की। मामले में चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी, जिनमें से एक की वर्ष 2018 में गिरफ्तारी से पहले ही मौत हो गई थी, जबकि एक आरोपित अब भी फरार है। अभियोजन ने कुल 23 गवाह पेश किए, जिनमें पुलिसकर्मी और फाेरेंसिक विशेषज्ञ शामिल थे, लेकिन अदालत ने इसे आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/20/मार्च/2026