राष्ट्रीय
20-Mar-2026


एलपीजी की किल्लत से घर लौटने को मजबूर हजारों मजदूर सूुरत (ईएमएस)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत के औद्योगिक शहरों तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। गुजरात के सूरत में गैस आपूर्ति प्रभावित होने के कारण बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने-अपने गांवों की ओर लौटने को मजबूर हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर एलपीजी गैस की कमी ने छोटे उद्योगों और फैक्ट्रियों पर भी असर डाला है। एलपीजी गैस की कमी के चलते कई फैक्ट्रियां अस्थायी रूप से बंद हो रही हैं। मजदूरों के सामने रोजगार और रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। प्रवासी मजदूर सचिन ने बताया कि हम गांव जा रहे हैं क्योंकि पिछले कुछ दिनों से गैस नहीं मिल रही है। हमारी कंपनियां भी बंद हो रही हैं। इसलिए क्या करें, भूखे मर रहे तो वापस गांव जा रहे हैं। हमारे पास पैसे नहीं हैं इसलिए वापस लौट रहे हैं। कोशिश की गैस पाने की, लेकिन सब अपना-अपना देखते हैं। यहां कोई मदद नहीं कर रहा। गैस सप्लाई शुरू होने पर ही लौटेंगे। बहुत लोग वापस जा रहे हैं। सचिन ने आगे बताया कि 4-5 दिनों से ज्यादा परेशानी हो रही है। 500 रुपये लीटर गैस मिल रही है और पैसे भी नहीं हैं। इसलिए गांव जा रहे हैं। वहीं प्रवासी मजदूर सीमा देवी ने कहा कि गैस की समस्या के कारण मैं अपने गांव लौट रही हूं। हमारे खाते बंद हो रहे हैं और पैसे भी नहीं हैं। जो भी मजदूरी करते हैं और 500-1000 रुपये उसमें डालते हैं, वो भी नहीं मिल रहे और गैस भी नहीं मिल रही। यह पूछने पर कि गैस कब से नहीं मिल रही, सीमा देवी ने कहा कि पिछले 15 दिनों से गैस नहीं मिल रही। एक हफ्ते पहले गैस खत्म हो गई थी फिर गैस की कमी हो गई। सीमा देवी का कहना है कि एजेंसी पर भी गए लेकिन अभी तक गैस नहीं मिली। मैं और मेरी बेटी जा रहे हैं जबकि पति और दो बच्चे यहीं रहेंगे। छोटे सिलेंडर तक नहीं मिल रहे हैं। एलपीजी की किल्लत से परेशान प्रवासी मजदूर सीमा देवी ने बताया कि हम उपले लाकर खाना बना रहे हैं। अभी हमारे पास फोन आया कि जो छोटा सिलेंडर चला रहे थे, वो भी खत्म हो गया। गली-गली खोज रहे हैं लेकिन छोटा सिलेंडर भी नहीं मिल रहा। गैस संकट के चलते सूरत में श्रमिकों के पलायन की स्थिति बन गई है जो न केवल स्थानीय उद्योगों के लिए चिंता का विषय है। बल्कि यह दिखाता है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का असर अब आम लोगों की जिंदगी पर भी गहराई से पड़ रहा है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस की कमी की खबरें आई। इस बीच केंद्र सरकार ने राज्यों को एक खास प्रस्ताव दिया है। केंद्र ने राज्यों से पाइप वाली नेचुरल गैस की पहुंच और कवरेज के विस्तार में तेज़ी लाने में मदद करने की अपील की है। केंद्र ने कहा कि अगर राज्य ऐसा करते हैं तो उन्हें प्रोत्साहन दिया जाएगा। यह प्रोत्साहन उन्हें कमर्शियल इस्तेमाल के लिए एलपीजी की अतिरिक्त मात्रा आवंटित करके दिया जाएगा। यानी जितनी जिस राज्य की मांग है, उसे 20 फीसदी अधिक दिया जाएगा। विनोद उपाध्याय / 20 मार्च, 2026