मनोरंजन
21-Mar-2026
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मुंबई (ईएमएस)। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर बादशाह का गाना ‘टटीरी’ और नोरा फतेही व संजय दत्त पर फिल्माया गया ‘सरके चुनर’ जैसे गाने आलोचना का शिकार हुए। हिंदी सिनेमा में गानों को लेकर उठने वाले ऐसे विवाद कोई नई बात नहीं हैं। अगर इतिहास पर नजर डालें तो 1971 में रिलीज हुई फिल्म हरे रामा हरे क्रष्णा का मशहूर गाना दम मारो दम भी इसी तरह के विवादों के केंद्र में रहा था। देव आनंद और जीनत अमान पर फिल्माया गया यह गीत उस दौर में काफी चर्चित हुआ, लेकिन इसके साथ ही भारी विरोध भी झेलना पड़ा। फिल्म में मुमताज भी महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आई थीं, जबकि इस गाने को आशो भोसले ने अपनी आवाज दी थी। इस गाने का संगीत आरडी बर्मन ने तैयार किया था और बोल आनंद बक्शी के थे। गाने में जीनत अमान को हिप्पी स्टाइल में चिलम पीते और नशे में डूबी हुई दिखाया गया था, जिसे उस समय समाज के एक बड़े वर्ग ने आपत्तिजनक माना। कई लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति के खिलाफ बताते हुए आरोप लगाया कि यह युवाओं को नशे की ओर आकर्षित कर सकता है और गलत संदेश देता है। दरअसल, फिल्म की कहानी का उद्देश्य हिप्पी संस्कृति और नशे की लत के दुष्प्रभावों को उजागर करना था। कहानी में देव आनंद का किरदार अपनी बिछड़ी हुई बहन की तलाश में काठमांडू पहुंचता है, जहां वह उसे पूरी तरह नशे की दुनिया में खोया हुआ पाता है। फिल्म स्पष्ट रूप से एंटी-ड्रग संदेश देती है, लेकिन गाने की कैची धुन और बोल्ड प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान अलग ही दिशा में खींच लिया, जिससे विवाद और बढ़ गया। विवाद इतना गहरा हो गया कि ऑल इंडिया रेडियो ने इस गाने के प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके अलावा दूरदर्शन ने भी जब फिल्म का टेलीविजन प्रसारण किया, तब इस गाने को पूरी तरह हटा दिया गया था। इसके बावजूद ‘दम मारो दम’ की लोकप्रियता कम नहीं हुई और समय के साथ यह हिंदी सिनेमा के सबसे आइकॉनिक गीतों में शामिल हो गया। दिलचस्प बात यह है कि भारी विरोध और बैन के बावजूद आशा भोसले को इस गाने के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका का पुरस्कार भी मिला। बता दें कि फिल्म इंडस्ट्री में इन दिनों अश्लील या बोल्ड इशारों वाले गानों को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहे हैं। सुदामा/ईएमएस 21 मार्च 2026