मथुरा(ईएमएस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपने मथुरा प्रवास के दौरान शनिवार को गोवर्धन पहुंचीं, जहाँ उन्होंने आस्था के प्रतीक गोवर्धन पर्वत की सात कोसी परिक्रमा की। इस यात्रा के साथ ही वह गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने वाली देश की पहली राष्ट्रपति बन गई हैं। राष्ट्रपति ने गोल्फ कार्ट के जरिए इस परिक्रमा को पूरा किया, जिसके बाद वे नई दिल्ली के लिए रवाना हुईं। उनके इस ऐतिहासिक दौरे को लेकर प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। इससे पूर्व, शुक्रवार को राष्ट्रपति ने वृंदावन स्थित रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम में नंद किशोर सोमानी कैंसर चिकित्सा ब्लॉक का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में रामकृष्ण मिशन को आध्यात्मिक चेतना और मानवतावादी सेवा के संगम का एक सशक्त प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण परमहंस की भक्ति और स्वामी विवेकानंद के सेवा संकल्प ने मानवता के कल्याण का जो मार्ग दिखाया है, वह आज भी निस्वार्थ सेवा और करुणा की वास्तविक अभिव्यक्ति है। अपने मथुरा प्रवास के दौरान राष्ट्रपति का कार्यक्रम काफी व्यस्त और आध्यात्मिक रहा। गुरुवार शाम मथुरा पहुंचने के बाद उन्होंने इस्कॉन मंदिर में प्रार्थना की और भव्य संध्या आरती में भाग लिया। शुक्रवार को उन्होंने श्री हित राधा केली कुंज आश्रम में प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से शिष्टाचार भेंट की। सुरक्षा के बीच हुई इस मुलाकात में राष्ट्रपति और महाराज के बीच अध्यात्म, सेवा और जनकल्याण जैसे गहन विषयों पर चर्चा हुई। आश्रम पहुंचने पर अनुयायियों ने उनका पारंपरिक तरीके से भव्य स्वागत किया।आध्यात्मिक केंद्रों के साथ-साथ राष्ट्रपति ने सामाजिक सरोकारों से जुड़ी संस्थाओं का भी दौरा किया। वे साध्वी ऋतंभरा द्वारा स्थापित वात्सल्य ग्राम पहुंचीं, जो बुजुर्गों और अनाथ बच्चों के संरक्षण के लिए जानी जाती है। वहां उन्होंने संस्थान के कामकाज की जानकारी ली और बच्चों व बुजुर्गों के साथ समय बिताया। राष्ट्रपति के इस दौरे ने ब्रज क्षेत्र की आध्यात्मिक गरिमा और सेवा भाव को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। वीरेंद्र/ईएमएस/21मार्च2026