कोलकाता (ईएमएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं और चुनाव आयोग ने निष्पक्ष व शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पूरे राज्य में केंद्रीय बलों की व्यापक तैनाती की जा रही है और चुनाव ड्यूटी में लगे अधिकारियों के साथ तालमेल मजबूत करने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय में लगातार बैठकों का दौर जारी है। रविवार को भी बलों की तैनाती को लेकर एक आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी मतदान केंद्र पर यदि वेबकास्टिंग 30 मिनट से अधिक समय तक बाधित रहती है तो वहां दोबारा मतदान कराया जाएगा। इस सख्त निर्देश का उद्देश्य मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखना और किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकना है। चुनावों की औपचारिक घोषणा से पहले ही केंद्रीय बलों की 480 कंपनियां राज्य में पहुंच चुकी हैं और फिलहाल गश्ती अभियान जारी है। सूत्रों के अनुसार, चरणबद्ध तरीके से करीब 2,000 और कंपनियां राज्य में तैनात की जाएंगी, जिससे कुल केंद्रीय बलों की संख्या लगभग ढाई लाख तक पहुंच सकती है। चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही आयोग ने राज्य पुलिस और प्रशासनिक ढांचे में बड़े स्तर पर फेरबदल भी शुरू कर दिया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राज्य पुलिस महानिदेशक, कोलकाता पुलिस आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर एकीकृत कमान और नियंत्रण प्रणाली बनाने पर जोर दिया है। यह प्रणाली मुख्य निर्वाचन अधिकारी को जिला मजिस्ट्रेटों और अन्य एजेंसियों से सीधे जोड़ेगी और चौबीसों घंटे निगरानी सुनिश्चित करेगी। इस बार चुनाव में तकनीक का भी व्यापक उपयोग किया जा रहा है। राज्य के सभी 80,719 मतदान केंद्रों पर 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग की व्यवस्था होगी और लगभग दो लाख सीसीटीवी कैमरों व वेबकैम के जरिए निगरानी की जाएगी। जरूरत पड़ने पर ड्रोन भी तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा फ्लाइंग स्क्वाड और क्विक रिस्पॉन्स टीमों के वाहनों में 360 डिग्री कैमरों से लाइव स्ट्रीमिंग होगी, जबकि केंद्रीय बलों के जवानों को बॉडी-वॉर्न कैमरे दिए जाएंगे। आयोग ने जिला चुनाव अधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि मतदाताओं को डराने-धमकाने या मतदान से रोकने की शिकायत मिलती है, तो संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें पद से हटाना या निलंबन भी शामिल है। इन सभी कदमों से साफ है कि इस बार पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। डेविड/ईएमएस 22 मार्च 2026