मनोरंजन
23-Mar-2026
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मुंबई (ईएमएस)। 90 के दशक के सुनहरे दौर में जब फिल्मी संगीत अपने चरम पर था, उस समय कई दिग्गज गायिकाओं के बीच गायिका अलका याज्ञनिक ने अपनी अलग पहचान कायम की। अलका का परिवार संगीत से गहराई से जुड़ा हुआ था। उनकी मां शुभा याज्ञनिक एक जानी-मानी शास्त्रीय गायिका थीं, जिनसे उन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा ली। महज छह साल की उम्र में उन्होंने आकाशवाणी पर गाना शुरू कर दिया, जो उनके करियर की पहली महत्वपूर्ण सीढ़ी साबित हुई। बचपन में ही वह अपनी मां के साथ मुंबई आ गईं, जहां उनकी मुलाकात मशहूर फिल्म निर्माता राज कपूर से हुई। उनकी आवाज से प्रभावित होकर राज कपूर ने उन्हें संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल से मिलवाया, जिससे उनके करियर को नई दिशा मिली। शुरुआत में उन्हें डबिंग आर्टिस्ट के रूप में काम मिला, लेकिन उन्होंने पार्श्वगायन को ही अपना करियर बनाने का निर्णय लिया। धीरे-धीरे उन्हें फिल्मों में गाने के अवसर मिलने लगे, लेकिन असली पहचान उन्हें फिल्म ‘तेजाब’ के सुपरहिट गीत ‘एक दो तीन’ से मिली, जिसने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। इसके बाद उन्होंने ‘कयामत से कयामत तक’, ‘साजन’, ‘कुछ कुछ होता है’ और ‘हम हैं राही प्यार के’ जैसी फिल्मों में कई यादगार गीत गाए, जो आज भी श्रोताओं की जुबान पर हैं। यह वह दौर था जब लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसी दिग्गज गायिकाओं का वर्चस्व था। ऐसे प्रतिस्पर्धी माहौल में अपनी जगह बनाना आसान नहीं था, लेकिन अलका याज्ञनिक ने अपनी मेहनत, समर्पण और अनोखी आवाज के दम पर खुद को स्थापित किया। उनकी आवाज में भावनाओं को अभिव्यक्त करने की अद्भुत क्षमता थी, जिसने हर गीत को खास बना दिया। अपने करियर में उन्होंने हजारों गीत गाए और कई भाषाओं में अपनी आवाज दी। कुमार सानू और उदित नारायण के साथ उनकी जोड़ी ने कई सुपरहिट गाने दिए, जिन्हें दर्शकों ने खूब पसंद किया। उनके गीत आज भी रेडियो, टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर समान रूप से लोकप्रिय हैं। सम्मानों की बात करें तो अलका याज्ञनिक को 7 फिल्मफेयर अवॉर्ड, 2 राष्ट्रीय पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। सुदामा/ईएमएस 23 मार्च 2026