अंतर्राष्ट्रीय
23-Mar-2026
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-डेमोक्रेट सांसद ने की ‘युद्ध अपराध और जनसंहार’ के रूप में मान्यता देने की मांग वाशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिकी सांसद ग्रेग लैंड्समैन ने अमेरिकी कांग्रेस की प्रतिनिधि सभा में एक अहम प्रस्ताव पेश किया है। इसमें 25 मार्च 1971 को बांग्लादेश में बंगाली हिन्दुओं के खिलाफ पाकिस्तानी सेना और जमात-ए-इस्लामी जैसे उसके सहयोगियों के हमले को ‘युद्ध अपराध और जनसंहार’ के रूप में मान्यता देने की मांग की गई है। ओहायो से डेमोक्रेट सांसद की तरफ से पेश यह प्रस्ताव विदेश मामलों पर प्रस्ताव समिति को भेजा गया है, जहां इस पर आगे विचार किया जाएगा। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि 25 मार्च 1971 की रात पाकिस्तान सरकार ने शेख मुजीबुर रहमान को जेल में डाल दिया। इसके बाद पाकिस्तानी सैन्य टुकड़ियों ने जमात-ए-इस्लामी की विचारधारा से प्रेरित कट्टरपंथी इस्लामी समूहों के साथ मिलकर पूरे पूर्वी पाकिस्तान में ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ नामक एक व्यापक कार्रवाई शुरू की, जिसमें आम नागरिकों का बड़े पैमाने पर नरसंहार किया गया। अगर अमेरिका संसद इस प्रस्ताव पर मुहर लगा देती है और बांग्लादेश में हिन्दुओं के खिलाफ पाकिस्तानी सेना और जमात-ए-इस्लामी के अत्याचार को नरसंहार के रूप में मान्यता देता है तो पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ेगा और अन्य देश और संस्थाएं भी इसी दिशा में कदम उठा सकते हैं। वहीं अमेरिका कुछ व्यक्तियों या संस्थाओं पर लक्षित प्रतिबंध लगा सकता है। प्रस्ताव में उस समय के ढाका में तैनात अमेरिकी वाणिज्य दूत आर्चर ब्लड की तरफ से भेजे गए प्रसिद्ध ‘ब्लेड कॉर्डर्स’ का भी जिक्र किया है। टेलीग्राम में उन्होंने लिखा था कि पाकिस्तानी सेना के मदद से गैर-बंगाली मुस्लिम समूह गरीब इलाकों पर हमले कर रहे हैं और वहां बंगालियों और हिंदुओं की हत्या कर रहे हैं। इस टेलिग्राम पर ढाका स्थित काउंसुल जनरल ऑफिस के 20 सदस्यों के हस्ताक्षर थे। इसमें कहा गया है, ‘लेकिन हमने इस मामले में इस आधार पर हस्तक्षेप न करने का फैसला किया है कि अवामी संघर्ष, जिसके लिए दुर्भाग्यवश ‘नरसंहार’ शब्द का इस्तेमाल किया जा सकता है, पूरी तरह से एक संप्रभु राष्ट्र का आंतरिक मामला है। प्रस्ताव में कहा गया कि उन्होंने खास तौर से धार्मिक अल्पसंख्यक हिंदुओं को सामूहिक नरसंहार, सामूहिक बलात्कार, धर्म-परिवर्तन और जबरन देश निकाला के जरिए पूरी तरह से मिटाने की कोशिश की। इस बात पर जोर देते हुए कि किसी भी जातीय समूह या धार्मिक समुदाय को उसके सदस्यों द्वारा किए गए अपराधों के लिए पूरी तरह से ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, यह प्रस्ताव अमेरिकी राष्ट्रपति से आग्रह करता है कि वे 1971 के दौरान पाकिस्तानी सशस्त्र बलों और उनके सहयोगी संगठन जमात-ए-इस्लामी द्वारा जातीय बंगाली हिंदुओं के खिलाफ किए गए अत्याचारों को ‘मानवता के ख़िलाफ़ अपराध’, ‘युद्ध अपराध’ और ‘नरसंहार’ के रूप में मान्यता दें। सिराज/ईएमएस 23 मार्च 2026