वॉशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब एक ऐसे आत्मघाती मोड़ पर पहुंच गया है, जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा मानी जाने वाली हॉर्मुज जलडमरूमध्य सीधे सैन्य टकराव का अखाड़ा बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि हॉर्मुज जलमार्ग को पूरी तरह सुचारू नहीं किया गया, तो ईरान के पावर प्लांट्स को निशाना बनाकर उन्हें उड़ा दिया जाएगा। इस धमकी के जवाब में ईरान ने भी अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्पष्ट किया है कि उनका देश किसी भी प्रकार के दबाव या धमकियों के आगे झुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि न तो ईरान और न ही कोई अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनी इन चेतावनियों से डरने वाली है; बेहतर होगा कि अमेरिका संवाद के लिए सम्मानजनक भाषा का उपयोग करे। ईरान ने आधिकारिक रुख अपनाते हुए कहा है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है, लेकिन युद्ध की स्थितियों के कारण वहां सुरक्षा नियम अब पहले से कहीं अधिक सख्त कर दिए गए हैं। ईरान के अनुसार, दुश्मन देशों या उनके सहयोगियों के जहाजों को रोका जा सकता है और अन्य जहाजों को भी गुजरने के लिए ईरान के साथ समन्वय करना अनिवार्य होगा। ईरान इसे अपने आत्मरक्षा के अधिकार के तौर पर देख रहा है। हालांकि, हकीकत यह है कि युद्ध के खतरों के कारण व्यापारिक जहाज इस मार्ग से गुजरने में खुद ही हिचक रहे हैं। 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-इजराइल हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता चरम पर है। कतर, सऊदी अरब और यूएई के ऊर्जा ठिकानों पर हुए हमलों और हॉर्मुज में बारूदी सुरंगें बिछाने की चेतावनियों ने तेल की वैश्विक कीमतों में आग लगा दी है। इस संकट का सबसे गंभीर प्रभाव उन देशों पर पड़ रहा है जो पूरी तरह मिडिल ईस्ट के तेल पर निर्भर हैं। जापान जैसा देश, जो अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत से अधिक तेल इसी क्षेत्र से मंगवाता है, अब सीधे कूटनीतिक वार्ताओं में जुट गया है। जापानी प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात कर स्पष्ट किया है कि यह युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा विनाशकारी झटका साबित हो सकता है। व्यावहारिक तौर पर इस मार्ग के बंद होने का एक बड़ा कारण समुद्री बीमा भी है। युद्ध की स्थिति में बीमा कंपनियां इस क्षेत्र को वार जोन घोषित कर देती हैं, जिससे या तो जहाजों को कवर मिलना बंद हो जाता है या फिर प्रीमियम की दरें 5 से 10 गुना तक बढ़ जाती हैं। ऐसे में भारी वित्तीय जोखिम और सुरक्षा खतरों के चलते जहाज कंपनियां खुद ही हॉर्मुज से दूरी बना रही हैं। भले ही कागजों पर रास्ता खुला हो, लेकिन जमीनी स्तर पर यह मार्ग फिलहाल दुनिया के लिए बंद जैसा ही नजर आ रहा है। वीरेंद्र/ईएमएस/23मार्च2026