इस्लामाबाद(ईएमएस)। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान के स्वास्थ्य को लेकर जारी चिंताओं के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। लंबे समय से लंदन में रह रहे इमरान खान के बेटे कासिम खान ने आखिरकार रावलपिंडी की अदियाला जेल में अपने पिता से मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद कासिम खान ने सोशल मीडिया के जरिए अपने पिता का एक तीखा संदेश सार्वजनिक किया है, जिसमें इमरान खान ने पाकिस्तान की न्यायपालिका और सरकार पर गंभीर प्रहार किए हैं। कासिम द्वारा साझा किए गए संदेश में इमरान खान ने न्यायपालिका के प्रति अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि देश के जजों को अपनी भूमिका पर शर्म आनी चाहिए। खान ने आरोप लगाया कि न्यायपालिका अपनी आत्मा बेच चुकी है और उसे देश की एकता या अखंडता की कोई परवाह नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि जब सत्तासीन लोग उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से नहीं तोड़ पाए, तो उन्होंने उनकी पत्नी बुशरा बीबी को निशाना बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने बुशरा बीबी के साथ जेल में हो रहे व्यवहार को अमानवीय और इस्लाम के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह सब सिर्फ उन्हें ब्लैकमेल करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। खान ने यह भी खुलासा किया कि बेटे के साथ मात्र 30 मिनट की मुलाकात करने के बदले उन्हें 24 घंटे के कठिन आइसोलेशन (एकांत कारावास) की सजा भुगतनी पड़ती है। बता दें कि इमरान खान के दोनों बेटे, सुलेमान और कासिम, काफी समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने पिता के मानवाधिकारों के हनन का मुद्दा उठा रहे थे। उन्होंने दावा किया था कि जेल में उचित इलाज न मिलने के कारण इमरान खान की दाहिनी आंख की रोशनी बेहद कम हो गई है। पहले पाकिस्तान सरकार पर वीजा न देने का आरोप लगाने के बाद, अंततः कासिम खान को पाकिस्तान आने की अनुमति मिली। 72 वर्षीय इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं और वर्तमान में अल-कादिर ट्रस्ट भ्रष्टाचार मामले में सजा काट रहे हैं। हाल ही में खान के वकील लतीफ खोसा ने इस्लामाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें आंखों के विशेषज्ञ उपचार के लिए शीफा अंतरराष्ट्रीय अस्पताल स्थानांतरित करने की मांग की थी। हालांकि, सरकार का दावा है कि चिकित्सा उपचार के बाद खान की दृष्टि में सुधार हुआ है। पिता और पुत्र की इस मुलाकात ने पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट पैदा कर दी है, जहाँ एक तरफ मानवाधिकारों का सवाल खड़ा है, वहीं दूसरी तरफ न्यायपालिका और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच टकराव गहराता दिख रहा है। वीरेंद्र/ईएमएस/23मार्च2026