व्यापार
23-Mar-2026


- जनवरी 2026 तक भारतीय घरों में रखे सोने की कुल कीमत 445 लाख करोड़ के पार नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीयों का सोने के साथ रिश्ता केवल निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भावनाओं, सांस्कृतिक महत्व और सुरक्षा की भावना से भी जुड़ा हुआ है। लेकिन हालिया आंकड़े यह दिखाते हैं कि यह संबंध अब देश की पूरी अर्थव्यवस्था (जीडीपी) को भी पीछे छोड़ चुका है। जनवरी 2026 तक भारतीय घरों में रखे सोने की कुल कीमत 5 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 445 लाख करोड़ रुपये) को पार कर चुकी है। आईएमएफ के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक के अनुसार 2025-26 में भारत की कुल जीडीपी 4.125 ट्रिलियन डॉलर रहने की उम्मीद है। यानी भारतीय घरों में रखा सोना देश की सालाना कमाई से लगभग 125 फीसदी अधिक मूल्यवान है। सीधे शब्दों में कहें, अगर भारत के सभी घरों का सोना एक साथ रखा जाए, तो यह पूरी देश की अर्थव्यवस्था से अधिक मूल्यवान साबित होगा। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की ताजा रिपोर्ट इस आंकड़े को और दिलचस्प बनाती है। जनवरी 2026 तक घरों में रखा सोना बीएसई में लिस्टेड सभी कंपनियों की कुल मार्केट कैप (460 लाख करोड़ रुपये) के लगभग बराबर पहुंच चुका है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारतीयों का भरोसा बैंक डिपॉजिट या शेयर बाजार से कहीं अधिक सोने पर है। आज घरों में जमा सोने की कीमत बैंकों और शेयर बाजार में निवेश के कुल योग का 1.75 गुना है। पिछले कुछ सालों में सोने के प्रति दीवानगी तेजी से बढ़ी है; मार्च 2019 में घरों में रखे सोने की वैल्यू 109 लाख करोड़ रुपये थी, जो अब चार गुना बढ़ चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब पैसा सोने में बंधा रहता है तो यह डेड एसेट बन जाता है और बाजार में घूमकर विकास में योगदान नहीं करता। इसके अलावा, भारत अपनी सोने की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए यह घरेलू पूंजी का बाहर जाना भी माना जाता है। वर्तमान में भारतीयों की गैर-रियल एस्टेट संपत्ति का लगभग 65 फीसदी हिस्सा केवल सोने में बंद है, जो निवेश और परंपरा का अनोखा मिश्रण दर्शाता है। सतीश मोरे/23मार्च ---