थोक बाजारों में अधिक आपूर्ति के चलते कीमतों में आई तेज गिरावट चेन्नई,(ईएमएस)। तमिलनाडु के कई जिलों में टमाटर उत्पादक गंभीर संकट में हैं क्योंकि बाजार की कीमतों में भारी गिरावट आई है। इसके चलते वे अपनी लागत तक वसूल नहीं कर पा रहे हैं। कई इलाकों में किसानों ने कटाई बंद कर दी है और कम दाम मिलने के कारण पूरी तरह तैयार फसल को खेतों में ही छोड़ दिया है। कीमतों में इस अचानक गिरावट का कारण कई उत्पादन क्षेत्रों से भारी मात्रा में आपूर्ति होना बताया जा रहा है, जिससे थोक बाजारों में अधिक आपूर्ति हो गई है। इसके चलते कम समय में ही कीमतों में तेज गिरावट आई, जिससे किसान हैरान रह गए और फसल के चरम सीजन में उनकी अपेक्षित आय प्रभावित हुई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक व्यापारियों द्वारा पिछले हफ्तों की तुलना में काफी कम दाम दिए जा रहे हैं, जिन किसानों ने खेती में भारी निवेश किया था, वे अब संचालन लागत संभालने में संघर्ष कर रहे हैं क्योंकि बाजार अतिरिक्त आपूर्ति को समाहित नहीं कर पा रहा है। बढ़ती मजदूरी लागत ने इस संकट को और बढ़ा दिया है। किसानों का कहना है कि कटाई और परिवहन की लागत ज्यादा होने से मौजूदा कीमतें खर्च को भी पूरा नहीं कर पा रही हैं। इसी वजह से नुकसान कम करने के लिए कटाई रोकने का चलन बढ़ रहा है। डिंडीगुल के किसानों ने बताया कि 14 किलोग्राम के एक टमाटर बॉक्स की कीमत घटकर 100 से 150 रुपए रह गई है, जबकि कुछ हफ्ते पहले यह 400 से 600 रुपए थी। वहीं, मजदूरी लागत करीब 400 रुपये प्रतिदिन है। रिपोर्ट के मुताबिक गिरती कीमतों और बढ़ती लागत के संयुक्त प्रभाव से कई किसानों ने नुकसान से बचने के लिए तोड़ाई बंद कर दी है। कई किसानों ने स्थिर बाजार की उम्मीद में खेती का विस्तार किया था लेकिन अब वे बढ़ते आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। कटाई की लागत लगभग 80 रुपए प्रति बॉक्स आंकी जा रही है लेकिन मौजूदा बाजार मूल्य बुनियादी खर्च भी नहीं निकाल पा रहा, जिससे किसानों का नुकसान और बढ़ रहा है। धर्मपुरी जिले में कीमतों में हल्की सुधार के संकेत मिले हैं, जहां हाल की बारिश के बाद आपूर्ति कम होने से कीमतें 13 से 15 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंची हैं। हालांकि, किसानों का कहना है कि बाजार अभी भी अस्थिर और अनिश्चित बना हुआ है। तिरुचिरापल्ली जिले के मरुंगापुरी क्षेत्र में भी स्थिति ऐसी ही है, जहां किसानों ने कटाई रोक दी है। तोड़ाई और परिवहन की लागत करीब 3,000 रुपये प्रति एकड़ होने के कारण मौजूदा कीमतों पर काम जारी रखना संभव नहीं है। विशेषज्ञों ने दीर्घकालिक समाधान की जरुरत पर जोर देते हुए बेहतर आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं और न्यूनतम समर्थन तंत्र जैसे उपायों की जरूरत बताई है, ताकि किसानों को बार-बार होने वाली कीमत गिरावट से बचाया जा सके और उन्हें स्थिर आय तय हो सके। सिराज/ईएमएस 23मार्च26