लेख
24-Mar-2026
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा भाजपा के ऊपर तीखा हमला किया है। ममता बनर्जी ने कहा,अघोषित रूप से पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाकर रखा गया है। एसआईआर के माध्यम से 63 लाख लाख मतदाताओं को मतदान से वंचित किया जा रहा है। मतदाता सूची अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है। जिन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची मे नहीं थे। उन मामलों की सुनवाई अभी चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने जो निर्देश चुनाव आयोग को दिए थे। चुनाव आयोग ने उनका पालन नहीं किया। इसके बाद भी पश्चिम बंगाल में चुनाव कराए जा रहे हैं।यह स्थिति आपातकाल की तरह है। चुनाव आयोग राज्य सरकार से विचार विमर्श किए बिना एक तरफा निर्णय ले रहा है। ममता बनर्जी ने तीखा हमला करते हुए कहा, अब जो भी अच्छा बुरा पश्चिम बंगाल में होगा। उसके लिए चुनाव आयोग और केंद्र सरकार ही जिम्मेदार होगी। जिस तरह से अधिकारियों को हटाया गया है। उसके कारण पश्चिम बंगाल की सारी प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा गई है ।चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद सारे निर्णय चुनाव आयोग द्वारा लिए जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में कानून व्यवस्था से लेकर हर स्थिति के लिए चुनाव आयोग और केंद्र सरकार ही जिम्मेदार होगी। ममता बनर्जी जिस तरह से आक्रामक हुई हैं। उससे लगता है,उन्होंने दिल्ली में जो कुछ केजरीवाल सरकार के साथ हुआ था। उसको ध्यान में रखकर सबक लिया है। केजरीवाल सरकार भी कोई निर्णय नहीं ले पा रही थी।उप राज्यपाल और चुनाव आयोग के माध्यम से सारे निर्णय लिए जा रहे थे। सारा ठीकरा केजरीवाल के सिर पर फोड़ा गया। जिस तरह से महाभारत में अभिमन्यु को चक्रव्यूह में घेर कर मारा गया था। इसी तरह से केजरीवाल को चक्रव्यूह में फंसाकर, वोट काटकर चुनाव आयोग द्वारा पक्षपात कार्यवाही करके सुंयोजित तरीके से आम आदमी पार्टी को हराया गया था। वर्तमान स्थिति को देखते हुए ममता बनर्जी अपनी बलि नहीं देना चाहती हैं। ऐसा लगता है ममता दीदी काली माई के रोद्र रूप को धारण करके, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और ज्ञानेश कुमार से लड़ने के लिए चुनाव मैदान में अस्त्र-शास्त्र के साथ आ गई हैं। ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सबसे बड़ा घुसपैठिया कह दिया है। इससे उनके आक्रामक तेवर का पता लगता है। ममता बनर्जी पिछले 6 महीनो से एसआईआर की लड़ाई जमीन से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ रही है। सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें कोई न्याय नहीं मिला। जिन मतदाताओं के नाम कटे हैं, उनकी सुनवाई पूरी नहीं हुई है। मतदाता सूची फाइनल हुए बिना चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसी तरह से चुनाव भी करा दिए जाएंगे। बिहार में भी ऐसा ही किया गया था। मनमाने तरीके से पश्चिम बंगाल के अधिकारियों को भाजपा के इशारे पर बदला जा रहा है। चुनाव कार्य में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों को चुनाव आयोग और गृह मंत्रालय द्वारा धमकाया जा रहा है। इस तरह का आरोप लगाते हुए ममता बनर्जी सड़क पर आकर लड़ाई लड़कर चुनाव मैदान में उतर रही हैं।जनता हमेशा आक्रामक तेवर के नेताओं को स्वीकार करती है। यह बात ममता बनर्जी अच्छी तरह से जानती हैं। ममता बनर्जी ने जिस तरह से भाजपा, चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है। उसके बाद केंद्र सरकार, भाजपा और चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार के लिए ममता का मुकाबला करना आसान नहीं होगा। चुनाव में धांधली और मनमानी कर पाना आसान नहीं होगा।इस चुनाव में सत्ता तक पहुंचाने के लिए ममता बनर्जी कोई भी कीमत चुकाने के लिए तैयार दिख रही हैं। केंद्रीय चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के लिए चक्रव्यूह ममता बनर्जी ने तैयार किया है। उसके बाद केंद्र सरकार, न्यायपालिका और चुनाव आयोग चक्रब्यहू में रहते हुए साख को बचाए रखने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन गई है। चुनाव मे क्या होगा, इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।बांग्लादेश में चुनाव आयोग ने शेख हसीना के पक्ष में विपक्ष को दबाने और शेख हसीना को जिताने का काम किया था। उसके परिणाम कुछ समय बाद ही बांग्लादेश में देखने को मिले। शेख हसीना को भारत की शरण लेनी पड़ी। बांग्लादेश का असर पश्चिम बंगाल में चुनाव में देखने को मिल रहा है। इस स्थिति में संवेदनशीलता के साथ निष्पक्षता और पारदर्शी तरीके से चुनाव कराना आयोग के लिए बड़ी चुनौती है। ईएमएस/24/03/2026