पटना, (ईएमएस)। जद (यू0) के प्रदेश प्रवक्ता परिमल कुमार ने सोशल मीडिया संवाद करते हुए कहा कि बिहार इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए वर्षों से चलाए जा रहे अभियान का प्रभाव अब व्यापक सामाजिक बदलाव के रूप में सामने आ रहा है। बिहार इंटरमीडिएट परीक्षा के समग्र परिणाम में छात्राओं की सफलता दर 86.23 प्रतिशत रही है, जबकि छात्रों की सफलता दर 84.09 प्रतिशत है। इतना ही नहीं, विज्ञान, वाणिज्य और कला-तीनों संकायों के टाॅप फाइव सफल विद्यार्थियों को सम्मिलित करने पर कुल 26 टाॅपर्स में 20 छात्राएं शामिल हैं। यह केवल परीक्षा परिणाम नहीं है, बल्कि यह बिहार में सामाजिक चेतना, महिला शिक्षा और आधी आबादी के आत्मविश्वास के उभार का सशक्त प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘‘समृद्धि यात्रा’’ कोई सामान्य प्रशासनिक दौरा नहीं है और न ही यह मात्र राजनीतिक यात्रा है। यह बिहार के समग्र, संतुलित और सहभागी विकास के माॅडल की जमीनी समीक्षा, प्रभावी क्रियान्वयन करने की एक गंभीर एवं ऐतिहासिक पहल है। जहानाबाद और अरवल जैसे जिले कभी देश के तथाकथित ‘‘रेड काॅरिडोर’’ के संवेदनशील क्षेत्रों में गिने जाते थे। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस चुनौती का समाधान केवल पुलिस या प्रशासनिक कार्रवाई से नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, राजनीतिक भागीदारी, महिलाओं के सशक्तिकरण, शिक्षा, सड़क, सिंचाई, जीविका, रोजगार, खेल, स्वास्थ्य और सामुदायिक भागीदारी पर आधारित विकास माॅडल के माध्यम से किया। समृद्धि यात्रा के दौरान जहानाबाद और अरवल में जिन योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया, वे इन जिलों के विकास की दिशा और दशा दोनों बदलने वाले साबित होंगे। अरवल में लगभग 153 करोड़ रुपये की लागत से 272 योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया गया, जबकि जहानाबाद में लगभग 252 करोड़ रुपये की लागत से 161 योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास हुआ। ये योजनाएँ केवल भौतिक आधारभूत संरचना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, ग्रामीण सड़क, प्रशासनिक अवसंरचना, खेल, सामुदायिक केंद्र, कृषि सुविधा, जल प्रबंधन, महिला सशक्तिकरण, दिव्यांगजन कल्याण और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने वाले बहुआयामी कार्यक्रम शामिल हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह सिद्ध किया है कि विकास केवल पुल, पुलिया, सड़क और भवन निर्माण तक सीमित नहीं है। वास्तविक विकास वह है, जिसमें समाज के प्रत्येक वर्गकृविशेषकर गरीब, महिला, किसान, युवा, दलित, पिछड़ा, अति पिछड़ा, अल्पसंख्यक, दिव्यांग और बुजुर्गकृको सम्मान, अवसर, सुरक्षा और भागीदारी मिले। समृद्धि यात्रा इसी दर्शन का विस्तार है। यह यात्रा ‘‘गुड गवर्नेंस’’ से आगे बढ़कर ‘‘प्राॅस्पेरिटी इन सोसाइटी’’ अर्थात समाज में वास्तविक समृद्धि और सहभागितापूर्ण विकास की अवधारणा को मूर्त रूप देती है। संतोष झा- २४ मार्च/२०२६/ईएमएस