नई दिल्ली (ईएमएस)। संसद में सांसद राघव चड्डा ने दावा किया है कि बाजार में जो पैकेटबंद जूस बीमारियों का घर है। इसमें ऐसे रसायन है जो बीमारी करते है। कंपनियां डिब्बे पर सही जानकारी नहीं देती जिसके कारण युवाओं को यह आसानी से बीमारियों का शिकार बनाता है। चड्डा ने इसके लिए तीखा सवाल करते हुए कहा कि बाजार में जो पैकेटबंद जूस हम पीते है उसकी पैकेजिंग से हमें लगता है कि यह बहुत ही ताजा और शुद्ध है। लेकिन वास्तव में वह बेहद खराब है। इस जूस में चीनी का घोल रहता है जो युवाओं को डायबिटीज, मोटापा और लाइफस्टाइल की कई बीमारियों का घर बनाता है। चड्डा ने सरकार से सवाल का जवाब मांगते हुआ कहा कि भारत का कंज्यूमर ब्रांड एक बड़ी बीमारी का शिकार है। जब हम फ्रूट जूस खरीदते हैं तो डिब्बे पर एकदम बढ़िया फ्रेश फ्रूट जूस की तस्वीर रहती है। यह बहुत अच्छी लगती है और इससे लगता है कि जूस बहुत ताजा है। लेकिन डिब्बे के पीछे छोटे-छोटे अक्षरों लिखा रहता है कि यह पिक्चर मार्केटिंग के लिए है। सरकार इस तरह के भ्रामक प्रचार पर पाबंदी लगाए। जूस के डिब्बे पर एफएसएसएआई की मुहर लगी है तो हम यह मान कर चलते हैं कि यह जूस सही होगा। एफएसएसएआई मार्क नहीं है तो इसका मतलब है कि इसकी शुद्धता की गारंटी नहीं है। पैकेटबंद जूस में कई तरह के प्रिजर्वेटिव्स, एडेड शुगर, हाई फ्रूक्टोज कॉर्न सिरप, कलर मिलाए जाते हैं। उपभोक्ताओं को साफ तौर से पता होना चाहिए कि वे जो खरीद रहे हैं, वह असली फ्रूट जूस है या फिर चीनी और प्रिजर्वेटिव से बना ड्रिंक। सुबोध/२४-०३-२०२६