बिलासपुर (ईएमएस)। डिजिटल दौर में अपराध के तरीके बदल रहे हैं, और अब पुलिस भी उसी तेजी से खुद को अपडेट कर रही है। साइबर ठगी और ऑनलाइन अपराधों पर लगाम कसने के लिए बिलासपुर रेंज में आयोजित कार्यशाला ने यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाला समय ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ का है। पुलिस महानिरीक्षक ं राम गोपाल गर्ग के नेतृत्व में साइबर अपराधों की रोकथाम एवं विवेचना की गुणवत्ता में सुधार विषय पर एक दिवसीय रेंज स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में रजनेश सिंह (उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक) और विजय पाण्डेय की विशेष उपस्थिति रही। कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को साइबर अपराधों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीकों, टूल्स और भारत सरकार द्वारा जारी नवीन दिशा-निर्देशों की जानकारी दी गई। उद्घाटन सत्र में अधिकारियों ने कहा कि तकनीक में दक्षता ही अपराधियों से आगे रहने का सबसे बड़ा माध्यम है। तकनीकी सत्रों में विभिन्न विशेषज्ञों ने अहम विषयों पर जानकारी साझा की। गगन कुमार ने गृह मंत्रालय द्वारा जनवरी 2026 में जारी नई गाइडलाइन के तहत साइबर ठगी के मामलों में रकम होल्ड और रिफंड की प्रक्रिया समझाई। वहीं नेटग्रिड, साइबर फॉरेंसिक, डार्क नेट और लाइव फ्रॉड डेमो जैसे विषयों पर भी विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। आधुनिक टूल्स जैसे सीडीआर एनालिसिस, सी-ट्रेस और सशक्त एप के उपयोग से चोरी के वाहनों की पहचान और अपराधियों की लोकेशन ट्रैकिंग पर भी विशेष जोर दिया गया। 100 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित हुआ, जिसमें अधिकारियों की व्यावहारिक समस्याओं का समाधान किया गया। लगभग 100 पुलिसकर्मियों ने इस प्रशिक्षण में भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य साइबर अपराधों में त्वरित कार्रवाई, पीडि़तों की राशि वापसी और अपराधियों तक पहुंच को और प्रभावी बनाना रहा। यह पहल आधुनिक तकनीक और पारंपरिक पुलिसिंग के बेहतर समन्वय की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है। मनोज राज 25 मार्च 2026