राष्ट्रीय
25-Mar-2026


-कोरोना काल में नियमों का पालन न करने और आचार संहिता उल्लंघन करने का था आरोप भागलपुर,(ईएमएस)। आदर्श चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के मामले में पूर्व नगर विधायक और कांग्रेस नेता अजीत शर्मा को एमपी-एमएलए कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया है। मंगलवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने 16 अक्टूबर 2020 को कोतवाली थाने में दर्ज किए गए केस के पर्याप्त प्रमाण न होने के कारण यह आदेश सुनाया। इस मामले में अंचल अधिकारी संजय कुमार ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि 16 अक्टूबर 2020 को अजीत शर्मा अपने समर्थकों के साथ नामांकन जुलूस निकाल रहे थे। जुलूस की शुरुआत स्टेशन चौक से हुई और यह खलीफाबाग चौक की ओर बढ़ा। शिकायत में यह आरोप लगाया था कि जुलूस में शामिल प्रत्याशी और उनके करीब 500 समर्थकों ने कोरोना काल के दौरान सामाजिक दूरी का पालन नहीं किया और मास्क का इस्तेमाल भी नहीं किया। इस जुलूस के चलते यातायात भी प्रभावित हुआ, जिससे राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। अंचल अधिकारी ने जुलूस की वीडियोग्राफी भी करवाई थी। इसके आधार पर उन्होंने इसे संज्ञेय अपराध मानते हुए आदर्श चुनाव आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज कराया। हालांकि, ट्रायल के दौरान कोर्ट ने केस के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए। एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस सबूत के किसी को भी दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसके चलते पूर्व नगर विधायक अजीत शर्मा को तत्काल रिहा कर दिया गया। इस फैसले से यह साफ हो गया साक्ष्य के अभाव में किसी भी चुनावी उल्लंघन का मामला सफलतापूर्वक साबित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में ऐसे मामलों में दस्तावेजी प्रमाण और वीडियो फुटेज का महत्व और ज्यादा बढ़ गया है। पूर्व नगर विधायक अजीत शर्मा की रिहाई राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। वहीं, प्रशासन और चुनाव अधिकारियों के लिए यह मामला चेतावनी भी है कि चुनावी आयोजनों में नियमों के पालन की निगरानी और प्रमाण सुनिश्चित करना अत्यंत जरुरी है। सिराज/ईएमएस 25मार्च26