विपक्ष की अनुपस्थिति पर जताई नाराजगी नई दिल्ली,(ईएमएस)। लोकसभा में बुधवार को वित्त विधेयक 2026 पर एक बार फिर चर्चा शुरू हुई, जिसमें निर्मला सीतारमण ने विधेयक को पारित करने का प्रस्ताव पेश किया। चर्चा के दौरान उन्होंने सरकार की आर्थिक नीतियों और सुधारों का विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण कोई तात्कालिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाला प्रयास है, जिसके परिणाम समय के साथ सामने आते हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार सुधारों को किसी दबाव या मजबूरी में नहीं, बल्कि स्पष्ट दृष्टिकोण, प्रतिबद्धता और आत्मविश्वास के साथ लागू कर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत आज “सुधार एक्सप्रेस” पर सवार है और तेजी से आर्थिक प्रगति की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वित्त मंत्री सीतारमण ने कर व्यवस्था में किए जा रहे सुधारों को रेखांकित करते हुए कहा कि सरकार ईमानदार करदाताओं को राहत देने और विश्वास-आधारित कर प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आम नागरिकों को राहत देने के उद्देश्य से सरकार ने जीवन रक्षक 17 महत्वपूर्ण दवाओं को मूल सीमा शुल्क से छूट देने का निर्णय लिया है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ और किफायती बन सकें। हालांकि, विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष की अनुपस्थिति पर सीतारमण ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि विपक्ष अक्सर सरकार से सवाल करता है, लेकिन जब जवाब देने का समय आता है तो सदन में मौजूद नहीं रहता। उन्होंने इसे संसदीय परंपराओं के विपरीत बताया। वित्त मंत्री ने पूर्व सरकारों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीमित प्रभाव पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र को कमजोर स्थिति में छोड़ा था और “डबल बैलेंस शीट” जैसी समस्या उत्पन्न की थी। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में 22 महीनों तक महंगाई दो अंकों में बनी रही, जो एक नकारात्मक रिकॉर्ड था, और उस समय लिए गए कर्ज का ब्याज आज भी चुकाया जा रहा है। हिदायत/ईएमएस 25मार्च26