-सीएम स्टालिन ने महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव पर जताई आपत्ति नई दिल्ली,(ईएमएस)। तमिलनाडु के सीएम और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन किए जाने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार ने पांच राज्यों के चुनावों को देखते हुए यह फैसला लिया है। उन्होंने 2011 की जनगणना को ही आधार मानकर महिला आरक्षण लागू करने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे समय में इस प्रस्ताव पर चर्चा कर रही है, जब चार राज्यों और पुदुचेरी में चुनाव होने हैं और वहां आचार संहिता लागू है। उन्होंने कहा कि यह अप्रत्याशित है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण पर सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर विचार कर रही है। यह 128वें संविधान संशोधन के विपरीत है, जो 2023 में पारित हुआ था। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि 2026 की जनगणना के आधार पर इसे लागू किया जाए। ऐसी ही बात 2023 के महिला आरक्षण एक्ट में कही गई थी। उन्होंने कहा कि हम बिना किसी शर्त के महिला आरक्षण का समर्थन करते हैं, लेकिन यह जरूरी है कि सीटों का परिसीमन सही तरीके से किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने परिसीमन में आनुपातिक प्रतिनिधित्व से किसी छेड़छाड़ का विरोध किया। इसके साथ ही उन्होंने अगले 30 सालों के लिए इस बात की गारंटी मांगी कि जो परिसीमन तय हो जाएगा, उसमें तीन दशकों तक कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। स्टालिन ने कहा कि यह हमारा मानना रहा है कि राज्यों में लोकसभा सीटों का जो अनुपात है, उसमें किसी तरह का बदलाव ना किया जाए। यह गारंटी अगले 30 सालों के लिए हो। उन्होंने कहा कि सरकार को फिलहाल इस प्रस्ताव को रोक लेना चाहिए। इसके लिए सरकार को जून की शुरुआत में एक विशेष सत्र बुलाना चाहिए, जिसमें महिला आरक्षण में संशोधन पर विचार किया जाए। सिराज/ईएमएस 25मार्च26