राज्य
25-Mar-2026


जयपुर (ईएमएस)। राजस्थान पारंपरिक रूप से एक कृषि प्रधान राज्य रहा है, लेकिन भौगोलिक विषमताओं, सीमित जल संसाधनों और सूखे जैसी चुनौतियों के कारण कृषि क्षेत्र में लंबे समय तक जोखिम और अनिश्चितता रहती है। वर्षा पर निर्भर खेती, कम उत्पादकता और सीमित तकनीकी हस्तक्षेप के चलते किसानों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। हालांकि, हाल के वर्षों में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार, आधुनिक तकनीकों के उपयोग, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और किसान-केंद्रित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से इस परिदृश्य में उल्लेखनीय बदलाव आया है। आज राजस्थान कृषि नवाचार, उत्पादकता वृद्धि और निवेश के क्षेत्र में तेजी से उभरते हुए राज्यों में शामिल हो रहा है।कृषि क्षेत्र में बदलाव की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी किसानों की आय और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करना रहा है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने केंद्र की योजनाओं के साथ समन्वय स्थापित करते हुए अतिरिक्त सहायता प्रदान की है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत किसानों को मिलने वाली राशि में राज्य स्तर पर अतिरिक्त सहयोग जोडक़र कुल सहायता को बढ़ाया गया है, जिससे लाखों किसानों को प्रतिवर्ष अधिक आर्थिक संबल मिल रहा है।इसके साथ ही, बड़ी संख्या में किसानों को हजारों करोड़ रुपये के फसली ऋण और ब्याज अनुदान उपलब्ध कराए गए हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत 6565 करोड़ रुपये तक के बीमा क्लेम वितरित किए गए, जिससे प्राकृतिक आपदाओं के समय किसानों को राहत मिली और उनकी जोखिम वहन क्षमता में वृद्धि हुई।राजस्थान जैसे जल-संकटग्रस्त राज्य में सिंचाई और जल संरक्षण को प्राथमिकता देना एक रणनीतिक निर्णय रहा है। राज्य में 43 हज़ार 844 फार्म पॉण्ड का निर्माण कर वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दिया गया है, वहीं 2.23 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में ड्रिप एवं मिनी स्प्रिंकलर प्रणाली स्थापित की गई है। खेती में गुणवत्ता सुधार के लिए वर्मी कम्पोस्ट को बढ़ावा दिया गया है। जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए 59 हज़ार 788 वर्मी कम्पोस्ट इकाइयों की स्थापना भी की गई है, जिससे टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित हो रही है।कृषि क्षेत्र में ज्ञान और कौशल विकास को भी प्राथमिकता दी गई है। 8.82 लाख से अधिक किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे वे नई तकनीकों को अपनाने में सक्षम हुए हैं।महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। 80 हजार से अधिक छात्राओं को 10+2 कृषि, स्नातक एवं स्नातकोत्तर कृषि तथा पीएचडी में अध्ययन हेतु क्रमश: 15,000, 25,000 तथा 40,000 रुपए प्रति छात्रा प्रतिवर्ष के अनुसार 144.84 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है। इससे कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है और समावेशी विकास को बल मिला है।उद्यानिकी क्षेत्र ने किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य में 65,412 सोलर पंप सेट स्थापित कर किसानों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया गया है, जिस पर 921 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया। अशोक शर्मा/ 5:40 बजे/25 मार्च 2026