लेख
26-Mar-2026
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पश्चिम एशिया में बदलते भू- राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारत ने जिस संतुलित,सजग और दूरदर्शी दृष्टिकोण का परिचय दिया है, वह न केवल उसकी प्रशासनिक क्षमता को दर्शाता है,बल्कि नागरिकों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने जैसी गंभीर स्थिति के बावजूद देश में पेट्रोल,डीजल और एलपीजी की उपलब्धता सामान्य बनी हुई है।यह तथ्य इस बात का प्रमाण है कि भारत ने ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर समय रहते ठोस और प्रभावी तैयारी कर रखी है।पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार देश की सभी रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर कार्य कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।पेट्रोल और डीजल के स्टॉक भी संतोषजनक स्तर पर बनाए रखे गए हैं।हालाँकि अफवाहों के चलते कुछ स्थानों पर घबराहट में खरीदारी देखने को मिली,लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि ईंधन की कोई कमी नहीं है और जनता को अफवाहों से दूर रहने की आवश्यकता है।घरेलू खपत को ध्यान में रखते हुए एलपीजी उत्पादन में वृद्धि की गई है। साथ ही, सरकार ने घरेलू एलपीजी और पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी)आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों के लिए भी संतुलित आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है,ताकि आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।विशेष रूप से होटल,रेस्तरां और सामुदायिक रसोई जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देना सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। सरकार द्वारा अधिसूचित प्राकृतिक गैस एवं पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश, 2026 इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।यह आदेश देशभर में पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार को गति देगा और ऊर्जा के स्वच्छ एवं सुलभ विकल्प के रूप में पीएनजी को बढ़ावा देगा।इससे न केवल पारंपरिक ईंधनों पर दबाव कम होगा,बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। एलपीजी आपूर्ति वैश्विक परिस्थितियों से प्रभावित अवश्य हुई है,लेकिन देश में कहीं भी ‘ड्राई-आउट’ की स्थिति नहीं है। घरेलू सिलेंडरों की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है।सरकार ने वाणिज्यिक एलपीजी का आवंटन बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया है, जिससे छोटे व्यवसायों और सेवा क्षेत्रों को राहत मिली है।इसके अतिरिक्त,केरोसिन और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधनों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है,ताकि माँग और आपूर्ति के बीच संतुलन बना रहे।राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों की भूमिका भी इस समय अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए सख्त प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है। हजारों छापों और सैकड़ों गिरफ्तारियों से यह स्पष्ट है कि प्रशासन इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह गंभीर है।जिला स्तर पर निगरानी समितियों और नियंत्रण कक्षों की स्थापना से स्थिति पर सतत नजर रखी जा रही है। समुद्री क्षेत्र में भी भारत की सक्रियता उल्लेखनीय है।पश्चिमी फारस की खाड़ी में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और किसी भी भारतीय जहाज के साथ कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है।24 घंटे सक्रिय नियंत्रण कक्ष के माध्यम से नाविकों और उनके परिवारों को निरंतर सहायता प्रदान की जा रही है।अब तक सैकड़ों भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा चुकी है,जो इस दिशा में सरकार के समर्पण को दर्शाती है।विदेश मंत्रालय द्वारा भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न देशों में स्थित भारतीय दूतावास चौबीसों घंटे कार्यरत हैं और जरूरतमंद नागरिकों को हर संभव सहायता प्रदान कर रहे हैं। 28 फरवरी से अब तक लाखों भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से स्वदेश लौट चुके हैं।विशेष उड़ानों और वैकल्पिक मार्गों के माध्यम से यह अभियान लगातार जारी है। इस पूरे परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि भारत ने वैश्विक स्तर पर शांति और स्थिरता का स्पष्ट संदेश दिया है। शीर्ष स्तर पर अंतरराष्ट्रीय संवाद के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि ऊर्जा आपूर्ति के महत्वपूर्ण मार्ग खुले और सुरक्षित बने रहें। वर्तमान परिस्थितियां निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण हैं,लेकिन भारत ने जिस संयम,समन्वय और रणनीतिक दक्षता के साथ इन चुनौतियों का सामना किया है, वह प्रशंसनीय है। सरकार के प्रयासों के साथ-साथ नागरिकों की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।अफवाहों से दूर रहना, संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना और प्रशासन का सहयोग करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।यह समय केवल संकट का नहीं,बल्कि सामूहिक समझदारी और राष्ट्रीय एकजुटता का भी है। यदि हम सभी संयम और जिम्मेदारी का परिचय दें,तो कोई भी वैश्विक चुनौती हमें विचलित नहीं कर सकती। ईएमएस/26 मार्च2026