नरेंद्र मोदी की भारत ही नहीं बल्कि, वैश्विक स्तर पर लोकप्रियता बरकरार है, उन्हें संपूर्ण धरती पर पसंद किया जाता है। लोकप्रियता के मामले में नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप को पुनः पछाड़ दिया है। भारत को चौथी अर्थ व्यवस्था बनाने का रिकॉर्ड हो या, भाजपा को अजेय बनाने का, वे हर क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य कर रहे हैं। दुनिया के कई क्षेत्र युद्ध से ग्रस्त हैं, ऐसे भयावह वातावरण में भी अधिकांश देशों के साथ भारत और नरेंद्र मोदी की मित्रता की प्रगाढ़ता में कोई कमी नहीं आई है। अमेरिका, इस्राइल और ईरान युद्ध में फंसे हुये हैं। डोनाल्ड ट्रंप की पहल के बावजूद आहत ईरान युद्ध रोकने को तैयार नहीं है लेकिन, ईरान का मानना है कि नरेंद्र मोदी शांति बहाल कराने में सक्षम हैं। नरेंद्र मोदी विश्व भर के नेताओं के संपर्क में हैं और उनसे लगातार वार्ता भी कर रहे हैं, इसी विषय पर प्रकाश डाल रहे हैं बीपी गौतम... विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता हैं नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर वैश्विक स्तर पर सबसे लोकप्रिय नेता बनकर उभरे हैं। अमेरिकी डेटा एनालिटिक्स फर्म मॉर्निंग कंसल्ट के ताजा सर्वे के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 68 प्रतिशत की अप्रूवल रेटिंग मिली है, जो उन्हें दुनिया के शीर्ष नेताओं में पहले स्थान पर बनाये रखती है। मॉर्निंग कंसल्ट द्वारा 2 से 8 मार्च के बीच किये गये सर्वे में पीएम नरेंद्र मोदी अपने वैश्विक समकक्षों से काफी आगे दिखाई दे रहे हैं, वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सूची के टॉप- 10 में भी स्थान नहीं बना पा सके हैं, उन्हें मात्र 39 प्रतिशत अप्रूवल रेटिंग मिली है। पीएम नरेंद्र मोदी के बाद दूसरे स्थान पर स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पारमेलिन और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग रहे, जिन्हें 62-62 प्रतिशत अप्रूवल रेटिंग प्राप्त हुई है। सूची में तीसरे और चौथे स्थान पर क्रमशः चेक गणराज्य और अर्जेंटीना के नेता रहे, जिन्हें 57 और 56 प्रतिशत की अप्रूवल रेटिंग मिली है, अन्य वैश्विक नेताओं की बात करें तो, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर को 24 प्रतिशत और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को मात्र 17 प्रतिशत अप्रूवल रेटिंग मिली है, जिससे वे काफी पीछे दिखाई दे रहे हैं। सरकार का नेतृत्व करने का रिकॉर्ड बना भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक नया रिकॉर्ड बना दिया है, वे देश के सबसे लंबे समय तक सरकार चलाने वाले नेता बन गये हैं। रविवार 22 मार्च 2026 को नरेंद्र मोदी कुल मिलाकर 8931 दिन तक अलग-अलग सरकारों के प्रमुख रह चुके हैं, जिससे वे अब भारत के सबसे लंबे समय तक सरकार चलाने वाले नेता बन चुके हैं, इस उपलब्धि के साथ उन्होंने पवन कुमार चामलिंग का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो कि 8930 दिन तक सिक्किम में सरकार के प्रमुख रहे थे। नरेंद्र मोदी ने 15 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाया था और अब लगातार लगभग 12 वर्षों से प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड बना चुके हैं, इन दोनों को मिला कर वे भारत में किसी भी चुनी हुई सरकार के सबसे लंबे समय तक प्रमुख रहने वाले पहले नेता बन गये हैं लेकिन, मुख्यमंत्री पद की ही बात करें तो, यह रिकॉर्ड अभी भी पवन कुमार चामलिंग (सिक्किम, 24 वर्ष 165 दिन) और नवीन पटनायक (ओडिशा, 24 वर्ष 99 दिन) के नाम पर दर्ज है। नरेंद्र मोदी का गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल 12 वर्ष, 227 दिन का रहा था। मुख्यमंत्री पद पर रिकॉर्ड बनाया नरेंद्र मोदी ने 7 अक्तूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली थी, उन्होंने भूकंप के बाद की चुनौतियों और राजनीतिक अस्थिरता के बीच केशुभाई पटेल का स्थान लिया था, इसके बाद उन्होंने 2002, 2007 और 2012 में लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीतकर गुजरात के सबसे लंबे समय तक रहने वाले मुख्यमंत्री का रिकॉर्ड बनाया, साथ ही उनका गुजरात मॉडल देश भर में लोकप्रिय लोकप्रिय हुआ। भाजपा को प्रचंड बहुमत दिलाने का रिकॉर्ड बना नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को भारत के 14वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी, उनके नेतृत्व में भाजपा ने तीन दशकों में पहली बार पूर्ण बहुमत (282 सीटें) प्राप्त किया, जिससे गठबंधन की राजनीति का युग समाप्त हुआ। मोदी ने नेहरू की बराबरी की नरेंद्र मोदी ने 2019 में 303 सीटें जीतकर अपनी स्थिति और मजबूत की। 2024 में भले ही 240 सांसद जीते लेकिन, सत्ता पर पकड़ कमजोर नहीं हुई, आज भी नरेंद्र मोदी सशक्त प्रधानमंत्री हैं, साथ ही जवाहरलाल नेहरू के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही हैं, जिन्होंने लगातार तीन कार्यकाल प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण की है। मोदी ने इंदिरा का रिकॉर्ड तोड़ा भारत में इंदिरा गांधी 4,077 दिन के साथ लगातार सर्वाधिक लंबे समय तक प्रधानमंत्री रही थीं, इस रिकॉर्ड को नरेंद्र मोदी तोड़ चुके हैं। सितंबर 2025 में अपने तीसरे कार्यालय के दौरान नरेंद्र मोदी लगातार सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बन गये हैं, साथ ही वे पहले गैर-कांग्रेसी नेता हैं, जिन्होंने लगातार दो पूर्ण कार्यकाल पूरे किये हैं। दुनिया की चौथी अर्थ व्यवस्था बनाया भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल में भारत की जीडीपी दोगुनी से भी अधिक 4.5 ट्रिलियन डॉलर के लगभग हो गई है। भारत 2014 की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से छलांग लगाकर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। भाजपा को बनाया अजेय भारत के अंदर 2014 में एनडीए गठबंधन सात राज्यों में सत्ता में था लेकिन, 2026 तक 19 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में भाजपा का शासन स्थापित हो गया, इनमें से 14 राज्यों में सीधी भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारें हैं। डिजिटल दुनिया के चक्रवर्ती सम्राट हैं मोदी नरेंद्र मोदी डिजिटल दुनिया के चक्रवर्ती सम्राट माने जाते हैं। वर्तमान में एक्स पर उनके 10.6 करोड़, इंस्टाग्राम पर 10 करोड़ से अधिक और यूट्यूब पर 3 करोड़ से अधिक सब्स क्राइबर्स हैं, जो उन्हें दुनिया के सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले राजनेताओं में से एक बनाते हैं। अब भी आगे हैं नेहरू और इंदिरा भारत के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड अभी भी जवाहरलाल नेहरू के नाम है, वे 16 वर्ष 286 दिनों तक प्रधानमंत्री रहे थे, उनके बाद इंदिरा गांधी अलग-अलग कार्यकालों को मिलाकर कुल समय 15 वर्ष 350 दिनों तक प्रधानमंत्री रही थीं, यह रिकॉर्ड 2029 के बाद ही टूटना संभव है। संकट में घिरे गुजरात को उबारा एक न्यूज एजेंसी के साथ नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के अनुभव को साझा करते हुए कहा था कि 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में काम शुरू किया तब राज्य कई बड़ी मुश्किलों से गुजर रहा था। गुजरात भूकंप, चक्रवात, सूखा और राजनीतिक अस्थिरता जैसी समस्याओं से जूझ रहा था। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों ने उन्हें और मजबूत बनाया और उन्होंने राज्य को आगे बढ़ाने के लिए पूरी ताकत लगा दी। उन्होंने अपनी मां की एक सीख का भी उल्लेख किया था कि गरीबों के लिए काम करना और कभी रिश्वत न लेना, जैसी सीख को उन्होंने अपने जीवन का मार्ग दर्शन बनाया। उनके कार्यकाल में गुजरात ने कृषि, उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी तरक्की की और एक मजबूत राज्य के रूप में उभरा। उन्होंने यह भी कहा कि 2014 में जब उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया तब देश में भरोसे का संकट था लेकिन, जनता ने उन्हें मजबूत समर्थन दिया। नरेंद्र मोदी ने दावा किया था कि पिछले 11 वर्षों में 25 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी से बाहर आए हैं और भारत दुनिया की बड़ी अर्थ व्यवस्थाओं में एक मजबूत देश बनकर उभरा है। पीएम मोदी ने महिलाओं, युवाओं और किसानों के सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि देश की सेवा करना उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। ट्रंप ने मोदी की प्रशंसा की पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत के साथ हमारे शानदार संबंध आगे और भी ज्यादा मजबूत होंगे। प्रधानमंत्री मोदी और मैं दो लोग हैं, जो चीजों को पूरा करते हैं, ज्यादातर लोगों के लिए ऐसा नहीं कहा जा सकता, इससे पहले भारत और अमेरिका के बीच उच्च स्तर पर अहम बातचीत हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात कर क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने की जरूरत पर दोनों नेताओं ने गंभीरता से विचार किया, क्योंकि यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। अमेरिकी राजदूत की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई बातचीत में पश्चिम एशिया के हालात और समुद्री सुरक्षा पर फोकस रहा, दोनों नेताओं ने माना कि होर्मुज जलडमरूमध्य का खुला रहना जरूरी है, ताकि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो। बातचीत के दौरान भारत ने तनाव कम करने और जल्द से जल्द शांति बहाल करने की जरूरत पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का खुला, सुरक्षित और सुगम बने रहना पूरी दुनिया के लिए बेहद जरूरी है, दोनों नेताओं ने क्षेत्र में स्थिरता और शांति के प्रयासों को लेकर संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई। तनाव को कम करने में भारत निभा सकता है अहम भूमिका: ईरान भारत में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहाली ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने में भारत अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक दक्षिण की एक प्रमुख शक्ति होने और अपनी संतुलित विदेश नीति के कारण पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने में अहम योगदान दे सकता है। डॉ. मोहम्मद फतहाली ने कहा कि भारत के पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़े हुए सभी देशों के साथ ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध हैं। उन्होंने कहा कि इसी के चलते यह भारत को गलतफहमियों को दूर करने और कूटनीतिक रास्तों को मजबूत करने में एक विश्वसनीय खिलाड़ी के रूप में स्थापित करते हैं। सवाल के जवाब में ईरानी राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहाली ने कहा कि युद्ध जारी है। उन्होंने दोहराया कि ईरान ने इस युद्ध को शुरू नहीं किया था लेकिन, इसे खत्म करने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि युद्ध का खात्मा ईरान की वैध शर्तों और मांगों के समाधान पर निर्भर करेगा। उन्होंने युद्ध रोकने के लिए ईरान की शर्तें बताते हुए कहा कि आक्रामक कार्रवाईयों पर पूरी तरह से लगाम लगे, हमले दोबारा नहीं होंगे, इसके लिए विश्वसनीय गारंटी दी जाये, हमलावरों को जवाबदेह ठहराया जाये, इसी के साथ ईरान के कानूनी अधिकारों और हितों का सम्मान सुनिश्चित किए जाये। डॉ. फतहाली ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान अपने देश की रक्षा के लिए हर संभव कोशिश करेगा। उन्होंने कहा कि प्रतिरोध की कीमत आत्म समर्पण से कम है और यही सिद्धांत ईरान के दृष्टिकोण का मार्गदर्शन करेगा। उन्होंने कहा कि ईरानी लोगों ने प्रतिरोध का मार्ग चुना है। ईरानी राजदूत ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ किसी भी तरह की बातचीत की खबरों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि ईरान की अमेरिका के साथ कोई सीधी या, अप्रत्यक्ष बातचीत नहीं चल रही है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 48 घंटे के अल्टीमेटम को लेकर कहा कि ईरान इससे न तो डरता है और न ही उनकी बातचीत के प्रस्तावों को वास्तविक मानता है। अहम बात मोहम्मद फतहाली के अनुसार यह है कि भारत का संतुलित विदेश नीति दृष्टिकोण और सभी पक्षों- अमेरिका, इजरायल और ईरान से ऐतिहासिक संबंध, उसे एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ बनाते हैं। दिल्ली में बोलते हुये उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत निश्चित रूप से तनाव कम करने में सकारात्मक और प्रभावी भूमिका निभा सकता है। ग्लोबल साउथ के प्रमुख देशों में से एक होने के नाते भारत संवाद को आगे बढ़ाने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि भारत के अमेरिका व इजरायल के साथ मजबूत रिश्ते और ईरान के साथ ऐतिहासिक संबंध, उसे गलतफहमियां दूर करने और कूटनीतिक रास्ते मजबूत करने में सक्षम बनाते हैं। (लेखक, दिल्ली से प्रकाशित हिंदी साप्ताहिक गौतम संदेश के संपादक हैं)