क्षेत्रीय
26-Mar-2026
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- जयंती पर विद्वान वक्ताओं के विचार जबलपुर, (ईएमएस)। अशोक का साम्राज्य भारतीय इतिहास में सबसे विशाल साम्राज्य था जो उत्तर में अफगानिस्तान से लेकर दक्षिण में कर्नाटक और पूर्व में बांग्लादेश से लेकर पश्चिम में ईरान तक फैला था । कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने बौद्ध धर्म अपना लिया और शांति व जन कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया । इसीलिए अशोक को सम्राट कहा जाता है । उपरोक्त आशय के विचार आज गुंजन कला सदन द्वारा सम्राट अशोक जयंती की पूर्व संध्या पर शहीद स्मारक भवन प्रांगण में आयोजित समारोह में प्रमुख वक्ता इतिहासकार डॉ. आनंद सिंह राणा ने व्यक्त किए । कार्यक्रम का आतिथ्य करते हुए डॉ. अभिजात कृष्ण त्रिपाठी, डॉ. प्रकाश दुबे, डॉ पुरूषोत्तम तिवारी एवं अभय जैन ने कहा कि भारत सरकार ने सिंह चतुर्मुख स्तंभ को राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया है, भारतीय ध्वज में अशोक चक्र को शामिल किया गया है । पं. नलिनकांत बाजपेई, राजेश पाठक प्रवीण एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शरदचंद पालन ने कहा कि सम्राट अशोक हमारे राष्ट्रीय गौरव हैं । अशोक चक्र सम्मान कर्तव्य के दौरान वीरतापूर्ण कार्यों पर दिया जाने वाला देश का सर्वोच्च सम्मान है । सम्राट अशोक जयंती राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होना चाहिए । कार्यक्रम का प्रारंभ पं. कामता तिवारी ने मंगलाचरण एवं प्रीति नामदेव भूमिजा ने वन्देमातरम के गान से किया । अतिथियों का स्वागत विजय जायसवाल, हिमांशु तिवारी, डॉ. सत्येन्द्र जैन, आलोक पाठक,सोमेश सराफ,विजय किसलय, विजय नेमा अनुज, राजीव गुप्ता,विक्रम परवार,राजेन्द्र मिश्रा, मोती शिवहरे,संतोष नेमा,गणेश प्यासा,ने मोतियों की माला से किया । संचालन प्रतुल श्रीवास्तव ने एवं आभार लायन नरेन्द्र जैन ने किया । इस अवसर पर नगर की साहित्यिक सांस्कृतिक संस्थाओं पाथेय, वर्तिका,सीनियर सिटीजन क्लव,अनेकांत, सशक्त हस्ताक्षर, शहीद स्मारक ट्रस्ट, पी एम जी, नवरंग, सुप्रभातम, मंथन, श्रमजीवी पत्रकार परिषद के उपस्थित सदस्यों ने सम्राट अशोक के प्रति सम्मान व्यक्त किया ।समारोह में अभिमन्यु जैन, रवींद्र राघव, उमाशंकर दुबे,डॉ. वंदना पांडे दुबे,तरुणा खरे,भारती साह,गजेंद्र राठौर,ज्योतिप्रकाश दुबे,बसंत सोनी,कौशल यादव, बच्चन श्रीवास्तव,भीमसिंह दीवान,रमाकान्त गौतम सहित गणमान्यजन उपस्थित थे। सुनील साहू / मोनिका / 26 मार्च 2026/ 01.50