कलेक्टर ने किया अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लघंन शाजापुर (ईएमएस) । कलेक्टर के आदेश पर एक बार फिर से हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया है। हाईकोर्ट जज ने कलेक्टर रिजु बाफना के खिलाफ टिप्पणी करते हुए कहा शाजापुर कलेक्टर को कुछ पता नहीं, नियमों को जानती नहीं और कुछ भी पास कर देती है। कुछ ही दिनों में कलेक्टर को यह तीसरी फटकार हाईकोर्ट से लगी है। इसके पहले भी हाईकोर्ट कलेक्टर के आदेशों पर तल्ख टिप्पणी कर चुका है।इस बार कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी जयंत बघेरवाल की दो वेतन वृद्धि से जुड़ा मामला है। कलेक्टर कार्यालय में वाहन स्टैंड को लेकर कलेक्टर शाजापुर ने वाहन स्टैंड ठेकेदार के विरुद्ध एफआईआर के आदेश दिए थे। ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद उसने कर्मचारी जयंत बघेरवाल पर आर्थिक लेन-देन के आरोप लगाएं। कलेक्टर ने बिना जांच के ही 27 फरवरी एवं 28 फरवरी 2025 को दो आदेश जारी किए, पहले आदेश में बघेरवाल की दो वेतन वृद्धि रोकने और दूसरे आदेश में उन्हें एसडीएम कार्यालय गुलाना अटैच किया गया। वेतन वृद्धि रोकने के आदेश पर पहले बघेरवाल ने कमिश्नर उज्जैन के यहां अपील की। कमिश्नर ने भी कलेक्टर के आदेश को यथावत रखा, उसके बाद बघेरवाल ने हाईकोर्ट की शरण ली। इन्दौर हाईकोर्ट ने 25 मार्च को स्टे आदेश जारी करते हुए कलेक्टर शाजापुर से 15 दिन में व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने का आदेश जारी किया है, हलफनामे में कलेक्टर शाजापुर को स्पष्ट करना है किन नियमों के तहत बिना जांच के दो वेतन वृद्धि रोकने के आदेश जारी किए हैं। स्टे आदेश में हाईकोर्ट ने स्पष्ट लिखा है कलेक्टर ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लघंन किया है। बिना किसी विभागीय जांच के दो वेतन वृद्धि रोकने के आदेश जारी कर दिएं। हाईकोर्ट ने कलेक्टर को फटकार लगाते हुए कहा शाजापुर कलेक्टर कुछ भी आर्डर पास कर देती है, आबकारी अधिकारी के मामले में भी ऐसा ही किया था। कलेक्टर को कानून पता नहीं है। पहला मामला 30 जून 2024 का है जिसमें हाईकोर्ट ने हाट मैदान स्थित भूमि को लेकर याचिका कर्ता महेश गुप्ता की याचिका पर कलेक्टर शाजापुर के खिलाफ कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट की कार्रवाई की थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी कलेक्टर शाजापुर एवं सीएमओ नगरपालिका शाजापुर ने हाट मैदान स्थित गुप्ता की भूमि पर लगने वाले हाट बाजार को नहीं हटाया। 16 मार्च 2026 को दूसरा मामला फिर आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही के निलंबन का था, जिसमें भी हाईकोर्ट ने निलंबन को गलत ठहराते हुए उन्हें फिर से बहाल किया। तीसरा मामला कर्मचारी जयंत बघेरवाल का है जिसमें हाईकोर्ट ने कलेक्टर को फटकार लगाते हुए तल्ख टिप्पणी की और कहा कलेक्टर को नियम पता नहीं है, कुछ भी आदेश कर देती है। दो मामलों में हाईकोर्ट जज जयकुमार पिल्लई ने कलेक्टर के आदेश के खिलाफ निर्णय सुनाया। 16 मार्च 2026 को आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही के निलंबन को निरस्त करते हुए कलेक्टर की कार्रवाई को गलत ठहराया, उसके बाद कर्मचारी जयंत बघेरवाल के मामले में कलेक्टर को फटकार लगाते हुए तल्ख टिप्पणी की और कहा कलेक्टर को नियम पता नहीं है, कुछ भी आदेश कर देती है। इस मामले में हाईकोर्ट एडवोकेट यश नागर ने बताया याचिका कर्ता जयंत बघेरवाल की दो वेतन वृद्धि और गुलाना अटैच किए जाने के मामले में दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए स्टे आदेश जारी किया है और 15 दिवस में कलेक्टर को व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने को कहा गया जिसमें स्पष्ट करना है किन नियमों के तहत बिना जांच के दो वेतन वृद्धि रोकने के आदेश जारी किए। राजेश कलजोरिया/26मार्च2026