यह कैसी बिडम्बना है कि इक्कीसवीं सदी में पहुंच कर भी भारतीय समाज का एक बड़ा हिस्सा आज भी टोना टोटका डायन भूत प्रेत और बाबाओं के चमत्कार पर भरोसा रखता है इतना ही नहीं ये संत के चोले में छिपे शैतान न सिर्फ अरबों करोड़ों की संपत्ति इकठ्ठा कर रहे हैं वरन हर तरह की पोपलीला भी टकर रहे हैं धर्म की आड़ में आर्थिक दैहिक शोषण बलात्कार, हत्या, ब्लैकमेलिंग करने जैसे गंभीर अपराधों को अंजाम देने वाले ढोंगी बाबाओं की सूची में अब एक नया नाम नासिक के अशोक खरात का जुड़ गया है। अशोक खरात की कहानी भी राम रहीम और आसाराम जैसे लोगों से अलग नहीं है। धर्म के नाम पर अपनी निजी जीवन की परेशानियों के निराकरण के लिए बाबा पर भरोसा कर आए लोगों को वाकजाल में फंसाना, उनसे धन ऐंठना और महिलाओं का यौन शोषण करना धंधा बन गया है । अब सामने आया है कि लम्बे समय से ये अपराध होते रहें और ढोंगी व्यक्ति खुद को भगवान बताकर चमत्कार दिखाता रहे तो यह न स्वस्थ समाज की पहचान है, न स्वस्थ राजनीति और प्रशासन की। क्योंकि ताकतवर लोगों के प्रोत्साहन के बिना ठगी और अपराध की ऐसी दुकानें चल ही नहीं सकतीं। हो सकता है कि अभी पुलिस हिरासत में आए इस अपराधी को कुछ वक्त तक सलाखों के पीछे ही रहना पड़े, लेकिन इस समय ज्यादा चिंता की बात यह है कि समाज जिस तरह चमत्कारों, अंधविश्वासों और अतार्किक प्रथाओं की सलाखों में कैद है, उससे वह कब आजाद हो पाएगा। कितनी बड़ी विडंबना है कि जिस महाराष्ट्र में संत तुकाराम संत नामदेव महात्मा ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, जैसे महापुरुषों की कतार दी, वहां अशोक खरात लोगों को अंधविश्वास की आग फैलाने का मौका मिला। नरेन्द्र दाभोलकर जैसे लोग अंधश्रद्धा के खिलाफ आवाज उठाएं तो उनकी हत्या कर दी जाए और अशोक खरात जैसे लोग अंधश्रद्धा के बूते खुद को गॉडमैन कहलवाएं। यह बेहद हैरत की बात है क्योंकि सरकारें भी ऐसी बातों पर तभी एक्शन लेती है जब बात बहुत आगे बढ़ जाती है। यूं तो देश का राजनीतिक दल इस किस्म के बाबाओं से खुद को दूर रखा है, हर दल में ऐसे नेता मिल जाएंगे, जो ढोंगी चोगों को बढ़ावा देते रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में समस्या कुछ ज्यादा बढ़ चुकी है, यह मानने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए। आज जब राष्ट्रपति के गरिमामयी पद पर आसीन माननीय किसी संत के स्थान पर आकर कथित एकांतिक वार्तालाप के लिए समय दे रहीं हैं ऐसे समय में समाज संत और कालनेमी संत की पहचान कैसे करे? विचारणीय बात यह है कि भगवदभक्ति में लगे लोगों को भौतिक चकाचौंध की दरकार क्यों होनी चाहिए। लेकिन इस सवाल की परतें खोलें तो समझ आता है कि ऐसे लोगों को न भगवदभक्ति से मतलब है, न धर्म की रक्षा से, इन्हें तो अपने उन राजनैतिक और व्यापारी आकाओं की सेवा करनी है, जिनके काले धन को धर्म के धंधे से ये सफेद करते हैं। अशोक खरात का मामला भी कुछ ऐसा ही लगता है। ताज़ा जानकारी के अनुसार नासिक में कथित ‘फर्जी बाबा’ अशोक खरात के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नरबलि और अंधश्रद्धा से जुड़े गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया है. नासिक पुलिस ने खरात के खिलाफ अब तक कुल 8 एफआईआर दर्ज की हैं, जिससे इस मामले की गंभीरता और बढ़ गई है. पुलिस ने आरोपी की लाइसेंसी रिवॉल्वर भी जब्त कर ली है और उसका लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. पुलिस के मुताबिक, ताजा एफआईआर उस व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज की गई है, जिसके खिलाफ पहले अशोक खरात ने खुद मामला दर्ज कराया था. अब उसी व्यक्ति ने खरात पर संगीन आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत में दावा किया गया है कि 2018 से 2025 के बीच आरोपी ने जान से मारने की धमकी देकर शिकायतकर्ता से भारी आर्थिक ठगी की आरोप है कि फरवरी 2020 से मार्च 2026 के बीच आरोपी ने एक महिला को अपने ऑफिस बुलाया. तांबे की बोतल में ‘मंत्रित पानी’ पिलाया गया. इसके बाद धार्मिक अनुष्ठान के नाम पर बार-बार शारीरिक संबंध बनाए. जब पीड़िता गर्भवती हुई तो बाद में गर्भपात के लिए दबाव डाला गया. मना करने पर जान और बच्चे को खतरे की धमकी दी गई. इस प्राथमिक रिपोर्ट में आरोप है कि ‘दिव्य औषधि’के नाम पर महिला का मानसिक और शारीरिक शोषण किया गया. स्वयंभू चमत्कारी बाबा यह शख्स अब महिलाओं के साथ शारीरिक शोषण, ब्लैकमेलिंग और करोड़ों की बेनामी संपत्ति बनाने के आरोपों में घिरा हुआ है। दरअसल 29 दिसंबर 2025 को अशोक खरात खुद वावी पुलिस स्टेशन पहुंचा और उसने शिकायत दर्ज कराई कि कुछ लोग उसके आपत्तिजनक फोटो और वीडियो के जरिए उसे ब्लैकमेल कर रहे हैं। शुरुआत में मामला ब्लैकमेलिंग का लगा, लेकिन जब पुलिस ने जांच शुरू की तो मोबाइल डेटा और साइबर जांच में कोई ठोस सबूत नहीं मिला। जिन लोगों पर आरोप लगाए गए थे, उन्हें भी अदालत से राहत मिल गई। यहीं से पुलिस को शक हुआ कि मामला कुछ और ही है। करीब डेढ़ महीने बाद 18 फरवरी 2026 को शिर्डी से एक और शिकायत सामने आई। एक महिला ने आरोप लगाया कि उसे एआई से तैयार अश्लील फोटो भेजकर धमकाया गया। इसी दौरान एक अहम गवाह सामने आया, जिसने पुलिस को कुछ ऐसे वीडियो दिखाए जिनमें कई महिलाओं के साथ अशोक खरात की आपत्तिजनक हरकतें नजर आई। आरोप है कि वह महिलाओं को धार्मिक झांसा देकर अपने जाल में फंसाता था और फिर उनका शोषण करता था। गवाह पहले डरा हुआ था, लेकिन पुलिस की सुरक्षा मिलने के बाद उसने ये सबूत सौंप दिए। मामला आगे बढ़ा तो 10 मार्च 2026 को अशोक खरात के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया और एयरपोर्ट पर उसे रोक दिया गया। फिर फड़नवीस सरकार ने 13 मार्च को एसआईटी गठित की और लगातार नए खुलासे सामने आने लगे। 17 मार्च को सरकारवाड़ा पुलिस स्टेशन में एक महिला ने बताया कि अशोक खरात ने खुद को दैवी शक्तियों वाला बताकर उसे अनुष्ठान के नाम पर अपने ऑफिस बुलाया। वहां उसे नशीला पदार्थ देकर बेहोश किया गया और उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया गया। इस शिकायत के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसके ठिकानों पर छापेमारी की गई, जहां से कई अहम सबूत मिले। आरोपी के पास से लाखों रुपये नकद, लैपटॉप, डिजिटल रिकॉर्डिंग डिवाइस और हथियार तक बरामद किए गए हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, यह भी सामने आया कि आरोपी ने अलग-अलग जगहों पर करोड़ों की संपत्ति जमा कर रखी है। नासिक, शिर्डी, पुणे और पनवेल जैसे शहरों में जमीन, बंगले और फार्महाउस उसके नाम या बेनामी रूप से जुड़े हुए पाए गए। कुल संपत्ति का अनुमान करीब 40 करोड़ रुपये से ज्यादा लगाया जा रहा है। पुलिस का आश्वासन मिलने के बाद अब कई पीड़िताएं सामने आई हैं और जादूटोना, यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर आरोप खरात पर लगे हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि एनसीपी अजित गुट की नेता और महाराष्ट्र महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर का भी एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो अशोक खरात के पैर धोती दिखाई दे रही हैं। हालांकि अब देवेन्द्र फड़नवीस ने उचित कदम उठाते हुए चाकणकर से इस्तीफा ले लिया है। वहीं चाकणकर का भी कहना है कि वो आरोपी को 2019 से जानती थीं और उसके काले कारनामों से परिचित नहीं थी। लेकिन उन्हें यह भी बताना चाहिए कि किसी पुरुष के पैर धोने जैसे काम क्या राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष को करना चाहिए। क्या इससे गैरबराबरी का संदेश नहीं जाता है। बहरहाल अब अशोक खरात तो पुलिस हिरासत में है, इस मामले में अब जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले इस केस की आंच राजनीति तक पहुंची थी और अब प्रशासनिक अधिकारी भी इसकी चपेट में आते नजर आ रहे हैं। इसी क्रम में मुंबई में उपजिलाधिकारी के पद पर कार्यरत अधिकारी अभिजीत भांडे पाटिल का तबादला कर दिया गया है। सरकार ने उनकी प्रतिनियुक्ति को तत्काल प्रभाव से समाप्त करते हुए उन्हें मंत्रालय भेजने के आदेश जारी किए हैं।लेकिन क्या एक अशोक खरात की गिरफ्तारी और सजा के बावजूद समाज से अंधविश्वास खत्म हो पाएगा, या समाज में धार्मिक चोले में रंगे शियार ऐसे ही धर्म को धंधा बना कर दैहिक मानसिक व आर्थिक शोषण कर फाइव स्टार सुविधा वाले महलनुमा आश्रमों में रंगरेलियां मनाते रहेंगे? (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं पिछले 38 वर्ष से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े हैं) ईएमएस / 26 मार्च 26