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29-Mar-2026
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वाशिंगटन,(ईएमएस)। पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के 30वें दिन प्रवेश करने के साथ ही इसके प्रभाव अब सात समंदर पार अमेरिका की सड़कों पर साफ दिखाई देने लगे हैं। शनिवार को अमेरिका के तमाम छोटे-बड़े शहरों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति और युद्ध के खिलाफ नो किंग्स विरोध प्रदर्शनों की तीसरी लहर देखी गई। लाखों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर युद्ध को तुरंत रोकने, बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने और प्रशासन की कठोर नीतियों में बदलाव की मांग की। यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान और इजरायल के बीच मिसाइलों और ड्रोनों का हमला तेज हो गया है, जिससे खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है। इस युद्ध की तपिश ने न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है, बल्कि अमेरिका के भीतर भी विभाजन और असंतोष की रेखाएं खींच दी हैं। प्रदर्शनों में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों ही विचारधारा वाले राज्यों के नागरिकों ने एकजुट होकर हिस्सा लिया, जो इस आंदोलन की व्यापकता को दर्शाता है। न्यूयॉर्क के मिडटाउन मैनहटन से लेकर सैन फ्रांसिस्को के सिविक सेंटर तक, प्रदर्शनकारियों ने तख्तियों, नारों और गीतों के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया। जहां एक ओर मैनहटन में लोग ट्रंप प्रशासन की आप्रवासन नीतियों और ईरान संघर्ष के विरुद्ध मार्च कर रहे थे, वहीं सैन फ्रांसिस्को में प्रदर्शनकारियों ने यूक्रेन के समर्थन और मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाई। सेंट पॉल, मिनेसोटा में आयोजित एक विशाल रैली ने इस आंदोलन को और मजबूती दी, जहां प्रसिद्ध रॉक कलाकार ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने अपनी प्रस्तुति से लोगों में उत्साह भरा। इस दौरान उन्होंने हाल ही में फेडरल इमिग्रेशन एजेंट्स की कार्रवाई में जान गंवाने वाले एलेक्स प्रेट्टी और रिनी गुड को भावभीनी श्रद्धांजलि भी दी। मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज ने भी संघीय नीतियों की तीखी आलोचना करते हुए स्थानीय समुदायों के साहस की सराहना की। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रदर्शनों के पीछे केवल युद्ध ही एकमात्र कारण नहीं है, बल्कि देश में बढ़ती ईंधन की कीमतें, आसमान छूती महंगाई और आर्थिक सुस्ती ने भी आग में घी डालने का काम किया है। हालांकि, फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच जैसे कुछ स्थानों पर राष्ट्रपति समर्थकों और विरोधियों के बीच मामूली जुबानी झड़पें हुईं, लेकिन कुल मिलाकर देश भर में ये प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे। जनता ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वे संघर्ष के बजाय आर्थिक स्थिरता और शांति को प्राथमिकता देते हैं। सरकार के लिए चुनौती अब यह है कि वह इस भारी जन-असंतोष और पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात के बीच कैसे संतुलन बिठाती है। वीरेंद्र/ईएमएस/29मार्च2026