हिजबुल्लाह की सैन्य ताकत के साथ सामाजिक आधार खत्म करना तेलअवीव,(ईएमएस)। लेबनान में जारी संघर्ष ने गंभीर मानवीय और रणनीतिक संकट पैदा कर दिया है। इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच बढ़ती टकराहट के बीच दक्षिणी लेबनान के हालात बेहद चिंताजनक हो चुके हैं। हाल के हफ्तों में इजरायली हमलों के कारण बड़े पैमाने पर तबाही और पलायन देखने को मिला है, जिससे यह आशंका है कि कहीं इस क्षेत्र को “नया गाजा” बनाने की रणनीति पर काम नहीं चल रहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस संघर्ष में अब तक करीब 1100 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि लगभग 12 लाख लोग अपने घर छोड़ चुके हैं। संघर्ष के कारण पूरे-के-पूरे गांव खाली हो गए हैं और जहां पहले सामान्य जीवन चलता था, वहां अब सिर्फ मलबा और सन्नाटा नजर आता है। खेत, बाजार और घर उजड़ चुके हैं, जिससे यह इलाका एक मानवीय त्रासदी का केंद्र बन गया है। वहीं विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि यह सब अचानक नहीं हो रहा, बल्कि एक तय रणनीति के मुताबिक ऐसा किया जा रहा है। यह रणनीति गाजा में अपनाए गए मॉडल से मिलती-जुलती है, जिसके तहत पहले लगातार बमबारी, फिर लोगों को इलाके खाली करने के निर्देश, और अंत में उस क्षेत्र को इस हद तक नष्ट कर देना कि लोग चाहकर भी वापस न लौट सकें। दक्षिणी लेबनान के बिंत जबैल, मरजायौन, हसबाया, नबातियेह और टायर जैसे इलाके इस रणनीति का केंद्र बने हुए हैं। इन क्षेत्रों का महत्व केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक भी है। यहां शिया मुस्लिम समुदाय की बड़ी आबादी रहती है, जहां हिजबुल्लाह और अमल मूवमेंट का प्रभाव है। साथ ही कुछ हिस्सों में ईसाई समुदाय और फिलिस्तीनी शरणार्थी भी रहते हैं। इस विविध आबादी का विस्थापन न केवल मानवीय संकट को बढ़ाता है, बल्कि क्षेत्रीय सामाजिक ढांचे को भी कमजोर करता है। वर्तमान स्थिति में हजारों लोग अस्थायी शिविरों, स्कूलों या खुले आसमान में जीन को मजबूर हैं। “सेफ जोन” घोषित किए गए क्षेत्रों में भी हमलों की खबरों ने लोगों के बीच भय और अविश्वास को बढ़ाया है। यह स्थिति गाजा जैसी मानवीय त्रासदी की याद दिलाती है। इस पूरी कार्रवाई के पीछे संभावित उद्देश्य को लेकर भी बहस तेज हुई है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल हिजबुल्लाह की सैन्य ताकत को कमजोर करने की कोशिश नहीं है, बल्कि उसके सामाजिक आधार को भी खत्म करने की योजना है। सीमा के पास के इलाकों को खाली कराकर संगठन की जमीनी पकड़ को कमजोर करना और लेबनान सरकार पर दबाव बनाना इसके पीछे का मकसद हो सकता है। हालांकि, इस रणनीति की सीमाएं भी हैं। लेबनान का भूगोल और सैन्य ढांचा गाजा से कहीं अधिक जटिल है। हिजबुल्लाह के पास उन्नत हथियार, मजबूत नेटवर्क और लंबे समय का युद्ध अनुभव है, जिससे इजरायल को कड़ी चुनौती मिल रही है। यही कारण है कि यह संघर्ष जल्दी खत्म होता नहीं दिख रहा। कुल मिलाकर, दक्षिणी लेबनान में जो हो रहा है, वह केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं, बल्कि एक गहरी मानवीय और सामाजिक त्रासदी है। यहां सिर्फ इमारतें नहीं, बल्कि पूरे समाज का ताना-बाना टूट रहा है, और यही इस युद्ध की सबसे दुखद सच्चाई है। आशीष/ईएमएस 27 मार्च 2026