नई दिल्ली,(ईएमएस)। पेट्रोल और डीजल पर केंद्र की मोदी सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए की कटौती पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरु हो गया है। विपक्षी दलों ने कटौती को चुनावी स्टंट और दिखावटी बताया है। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि इससे जनता को वास्तविक फायदा कितना होगा, यह स्पष्ट नहीं है और सरकार को स्थायी समाधान पर ध्यान देना चाहिए। कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने इस कटौती को पूरी तरह राजनीतिक कदम बताया, जिसमें केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी घटाकर जनता को राहत दिखा रही है, लेकिन अन्य माध्यमों से वहीं बोझ जनता पर डाला जा सकता है। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि यह ऐसा है जैसे पहले अधिक वसूली की जाए और फिर थोड़ी राहत देकर बड़ा एहसान दिखाया जाए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के समय पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम थीं, जबकि वर्तमान में कई गुना बढ़ गई हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी मोदी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए और इस पहले लगाए गए “अनावश्यक” टैक्स का आंशिक कम होना बताया। वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद अशोक मित्तल ने चुनावी रणनीति से जोड़कर कहा कि यह कदम राज्यों में होने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर उठाया गया है। दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद मियां अल्ताफ अहमद लारवी ने इस पहल को राहत देने वाला कदम बताया। उनका कहना है कि अगर यह कटौती नहीं होती, तब पेट्रोल-डीजल की कीमतें और बढ़ सकती थीं, जिससे उपभोक्ताओं पर असर पड़ता। लारवी ने जम्मू-कश्मीर के लिए केंद्र द्वारा मंजूर 5,000 करोड़ रुपए के अतिरिक्त वित्तीय पैकेज का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे राज्य में रुके विकास कार्यों को गति मिलेगी और लंबित कर्मचारियों के बकाया भुगतान जैसे मुद्दों का समाधान संभव होगा। कुल मिलाकर, सरकार की एक्साइज ड्यूटी में कटौती पर राजनीतिक मतभेद स्पष्ट हैं—विपक्ष इसे चुनावी लाभकारी और दिखावटी राहत मान रहा है, जबकि कुछ सांसद इसे जनता को राहत देने वाला कदम मानते हैं। स्थायी समाधान और आर्थिक संतुलन पर चर्चा की आवश्यकता बनी हुई है। आशीष दुबे / 27 मार्च 2026