अंतर्राष्ट्रीय
28-Mar-2026
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बीजिंग(ईएमएस)। भारत के पड़ोसी देश चीन से आई एक खबर ने रक्षा विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (पीएलए) ने अपने चेंगदू जे-10सी फाइटर जेट को एक नए और आधुनिक रडार सिस्टम के साथ एकीकृत किया है। चीन का दावा है कि इस तकनीक के जरिए वह 5वे जनरेशन के स्टील्थ फाइटर जेट्स को भी ट्रैक और इंटरसेप्ट कर सकता है। यदि चीनी दावों को सही माना जाए, तो यह रडार प्रणाली चौथी पीढ़ी के विमानों जैसे राफेल और तेजस को 500 किलोमीटर दूर से ही पहचान कर उन्हें आसमान में ही निशाना बनाने में सक्षम है। हाल ही में चीन ने एक उच्च-तीव्रता वाले सैन्य अभ्यास के दौरान जे-10सी को अपने अत्याधुनिक फ्लाइंग रडार केजे-500 के साथ जोड़कर परखा है। जो एक तीसरी पीढ़ी का एयरबोर्न अर्ली वार्निंग विमान है, जो शानेक्सी वाय-9 प्लेटफॉर्म पर आधारित है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसमें लगे तीन येसा रडार पैनल हैं, जो बिना घूमे ही 360 डिग्री की निरंतर निगरानी प्रदान करते हैं। यह रडार न केवल स्टील्थ विमानों का पता लगाने में सक्षम है, बल्कि एक साथ सैकड़ों लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है। चीनी रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह विकास पारंपरिक युद्ध शैली से हटकर सिस्टम-ऑफ- सिस्टम्स युद्ध की दिशा में एक बड़ा कदम है। केजे-500 लगभग 12 घंटे तक लगातार उड़ान भर सकता है और युद्ध के दौरान फाइटर जेट्स के लिए एक कमांड सेंटर के रूप में कार्य करता है। चीन की इस बढ़ती तकनीक और हवाई निगरानी क्षमता के बीच, भारत के लिए मिशन सुदर्शन चक्र और राफेल जैसे प्रोजेक्ट्स का समय पर पूरा होना रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। बता दें कि भारत की भौगोलिक स्थिति उसे एक साथ दो मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करने के लिए मजबूर करती है। एक ओर चीन की विस्तारवादी नीतियां हैं, तो दूसरी ओर पाकिस्तान की ओर से होने वाली अशांति। इन खतरों को देखते हुए नई दिल्ली अपनी सैन्य क्षमता को 21वीं सदी के युद्ध कौशल के अनुरूप ढालने में जुटी है। भारतीय नीति-निर्माताओं का पूरा ध्यान अब डिफेंस सेक्टर को सुपरपावर बनाने पर है, जिसके तहत थल, नभ और जल सेना के लिए कई रणनीतिक प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। राष्ट्रीय हवाई क्षेत्र को एक अभेद्य किले में बदलने के लिए भारत ने ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य हिस्सा रूस से प्राप्त एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम है। सरकार का लक्ष्य साल 2035 तक इस पूरे प्रोजेक्ट को पूर्ण रूप से जमीन पर उतारने का है। साथ ही, वायुसेना की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए फ्रांस से 114 राफेल एफ-4 फाइटर जेट खरीदने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है। वीरेंद्र/ईएमएस 28 मार्च 2026