राष्ट्रीय
28-Mar-2026
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-अब भारत सीमाओं की रक्षा नहीं करेगा बल्कि आसमान में भी पकड़ करेगा मजबूत नई दिल्ली,(ईएमएस)। मिडिल ईस्ट में जंग जारी है। इसी बीच भारत ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। भारत ने पहली बार अपनी अगली पीढ़ी की एयर डिफेंस ताकत की झलक दुनिया को दिखाई। यह सिर्फ एक सिस्टम नहीं है। यह संदेश है कि आने वाले समय में भारत सिर्फ अपनी सीमाओं की रक्षा नहीं करेगा बल्कि आसमान पर कंट्रोल की लड़ाई में भी पीछे नहीं रहेगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) ने अपने स्वदेशी लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस सिस्टम प्रोजेक्ट कुशा का पहला परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जिसे आधिकारिक तौर पर एक्सटेंडेड रेंज एयर डिफेंस सिस्टम यानी ईआरएडीएस कहा जा रहा है और इसे सीधे तौर पर एस400 एयर डिफेंस सिस्टम जैसे सिस्टम के बराबर माना जा रहा है। करीब 21,700 करोड़ का यह प्रोजेक्ट भारत के सबसे अहम सैन्य और नागरिक ठिकानों को एक अभैद सुरक्षा कवच देने के लिए बनाया जा रहा है, लेकिन इस सिस्टम की असली ताकत क्या है? इसका जवाब छिपा है इसके तीन लेयर वाले डिफेंस में। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पहला एम1 इंटरसेप्टर 150 किमी की रेंज जो फाइटर जेट्स और प्रसीजन वेपंस को हवा में ही खत्म कर सकता है। दूसरा एम2 इंटरसेप्टर 350 किमी रेंज एईएसए रडार के साथ और ज्यादा सटीक और ज्यादा खतरनाक है। तीसरा एम3 इंटरसेप्टर 350 से 400 किमी रेंज जो एब्ल्यूएसीएस जैसे हाई वैल्यू टारगेट और बैलस्टिक मिसाइल तक को निशाना बना सकता है यानी एक ऐसा मल्टी लेयर शील्ड जो दुश्मन के किसी भी हवाई हमले को कई स्तरों पर रोक सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास स्टेल्थ फाइटर, क्रूज मिसाइल, ड्रोन या फिर बैलस्टिक मिसाइल सबके लिए जवाब तैयार है और टाइमलाइन भी साफ है। 2026 फ्लाइट टेस्ट शुरू। 2028 शुरुआती तैनाती और 2030 तक पूरा ऑपरेशनल नेटवर्क। भारतीय वायुसेना पहले ही कई स्क्वाड्रनों की जरूरतों को मंजूरी दे चुकी है। यह सिस्टम मिशन सुदर्शन चक्र का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य है साल 2035 तक पूरे भारत में एक इंटीग्रेट एयर और मिसाइल डिफेंस नेटवर्क तैयार करना, जहां आकाश, एमजी और अन्य बैलस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम एक साथ काम करेंगे। क्या यह भारत का अपना एस400 है या फिर उससे भी आगे की तैयारी? क्योंकि जब दुनिया मिडिल ईस्ट की जंग में एयर डिफेंस की असली परीक्षा देख रही है। भारत उसी वक्त अपने भविष्य की तैयारी कर रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि इस जंग में मिलने वाले हर ऑपरेशनल और टेक्निकल सबक भारत अपनी रणनीति में शामिल करेगा। यह एक टेस्ट नहीं है एक संकेत है आने वाले समय में भारत सिर्फ अपनी सीमाओं की रक्षा नहीं करेगा बल्कि आसमान में अपनी पकड़ को और भी मजबूत करेगा। सिराज/ईएमएस 28 मार्च 2026