-मिर्ज़ा मुराद शाह की हवेली और मेडिकल संस्थान की नींव, आज भी मौजूद है यहां मज़ार नई दिल्ली,(ईएमएस)। पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (पीएमसीएच) सिर्फ बिहार का सबसे बड़ा अस्पताल ही नहीं, बल्कि अपने भीतर एक दिलचस्प ऐतिहासिक कहानी भी समेटे हुए है। इस अस्पताल की ज़मीन का संबंध ईरान के एक शहज़ादे मिर्ज़ा मुराद शाह से जुड़ा हुआ है। जानकारी अनुसार पीएमसीएच परिसर में आज भी “हज़रत साहब” के नाम से प्रसिद्ध मिर्ज़ा मुराद शाह की मज़ार मौजूद है, जहां बड़ी संख्या में लोग आस्था के साथ पहुंचते हैं। स्थानीय लोग उन्हें एक सूफ़ी संत के रूप में मानते हैं और उनकी दरगाह पर दुआ मांगते हैं। इतिहास के अनुसार, मिर्ज़ा मुराद शाह मुगल काल के दौरान जहाँगीर और शाहजहाँ के दरबार से जुड़े थे। वे मिर्ज़ा रुस्तम सफ़वी के पुत्र थे, जो बिहार के सूबेदार रह चुके थे और फ़ारस (वर्तमान ईरान) के सफ़वी वंश से ताल्लुक रखते थे। दरबार से इस्तीफा लेने के बाद मिर्ज़ा मुराद शाह ने अपना जीवन पटना में बिताया। उन्होंने गंगा किनारे अपनी हवेली, बाग़ और बाजार बसाया, जिन्हें “मुराद कोठी”, “मुराद बाग़” और “मुरादपुर” के नाम से जाना गया। ब्रिटिश काल में 1857 के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए पटना में एक मेडिकल संस्थान खोलने का निर्णय लिया गया। शुरुआत में “बांकीपुर डिस्पेंसरी” खोली गई, जिसे बाद में जगह की कमी के कारण 1875 में मिर्ज़ा मुराद शाह की हवेली (मुराद कोठी) में स्थानांतरित किया गया। यही स्थान आगे चलकर विकसित होकर पीएमसीएच बना। समय के साथ यह परिसर विस्तारित हुआ और 1927 में औपचारिक रूप से मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुई। आज जिस जगह पीएमसीएच का प्रशासनिक भवन खड़ा है, वहीं कभी मुराद कोठी हुआ करती थी। इस तरह, आधुनिक चिकित्सा का यह बड़ा केंद्र एक ऐसे ऐतिहासिक व्यक्तित्व से जुड़ा है, जिनकी विरासत आज भी मज़ार और स्थानीय परंपराओं के रूप में जीवित है। पीएमसीएच केवल इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और संस्कृति का भी अनोखा संगम है। हिदायत/ईएमएस 28 मार्च 2026