राष्ट्रीय
28-Mar-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। मध्य पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है। युद्ध की इन परिस्थितियों के कारण पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है। इस संभावित संकट को भांपते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर बड़े पैमाने पर काम शुरू कर दिया है। सरकार की योजना प्रदेश भर की गौशालाओं में गोबर गैस प्लांट (बायोगैस) स्थापित कर एलपीजी रसोई गैस का एक ठोस विकल्प तैयार करने की है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत उत्तर प्रदेश में संचालित सभी 7,527 गौशालाओं और गो-आश्रय स्थलों को ऊर्जा उत्पादन के केंद्रों में बदला जाएगा। वर्तमान में राज्य के इन केंद्रों में लगभग 12.39 लाख गोवंशीय पशु मौजूद हैं। अब तक इन गौशालाओं से प्राप्त गोबर का मुख्य उपयोग केवल जैविक खाद या कंपोस्ट बनाने तक सीमित था, लेकिन अब इसके एक-एक अंश का उपयोग ईंधन उत्पादन के लिए किया जाएगा। वर्तमान में 80 बड़ी गौशालाओं में बायोगैस प्लांट पूरी तरह क्रियाशील हैं, जिन्हें सफलता के मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस परियोजना को मिशन मोड पर चलाने के निर्देश दिए हैं। योजना का उद्देश्य न केवल ईंधन के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करना है, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों को रसोई गैस की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी से राहत दिलाना भी है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक क्रांतिकारी कदम साबित होगी। रणनीति के अनुसार, पहले चरण में सरकारी और संरक्षित गौशालाओं में प्लांट लगाए जाएंगे। इसके बाद दूसरे चरण में व्यक्तिगत पशुपालकों को भी इस दायरे में लाया जाएगा। आंकड़ों पर गौर करें तो प्रदेश में 6,433 अस्थायी गौशालाओं में 9.89 लाख, 518 वृहद गो-संरक्षण केंद्रों में 1.58 लाख और कान्हा व कांजी हाउस जैसे केंद्रों में हजारों गोवंश पल रहे हैं। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत भी लाखों गोवंश पशुपालकों के पास हैं, जिन्हें इस श्रृंखला से जोड़ने की तैयारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी देशों में छिड़ा युद्ध यदि लंबा खींचता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो उत्तर प्रदेश का यह स्वदेशी विकल्प आम जनता के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करेगा। इससे न केवल कचरे का सही प्रबंधन होगा, बल्कि गांवों में ऊर्जा के सस्ते और सुलभ स्रोत उपलब्ध होंगे। वीरेंद्र/ईएमएस 28 मार्च 2026