अंतर्राष्ट्रीय
29-Mar-2026
...


वॉशिंगटन(ईएमएस)।अमेरिकी सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति की हालिया सुनवाई के दौरान प्रस्तावित गोल्डन डोम मिसाइल रक्षा प्रणाली की व्यवहार्यता और उसकी भारी-भरकम लागत को लेकर गंभीर बहस छिड़ गई है। वरिष्ठ अमेरिकी सीनेटर मार्क केली ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर सवाल उठाते हुए चेतावनी दी है कि यह प्रणाली भविष्य की चुनौतियों और भौतिकी की सीमाओं के सामने अपर्याप्त साबित हो सकती है। केली ने आशंका जताई कि यदि अमेरिका इस पर 500 अरब से 1 ट्रिलियन डॉलर तक खर्च कर देता है और अंत में यह प्रभावी रूप से काम नहीं करती, तो यह एक बड़ा रणनीतिक जोखिम होगा। प्रस्तावित गोल्डन डोम एक बहु-स्तरीय सुरक्षा ढाल है, जिसे हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल्स और उन्नत क्रूज़ मिसाइलों जैसे जटिल खतरों को रोकने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। सुनवाई के दौरान सीनेटर केली ने जोर देकर कहा कि यद्यपि एक मजबूत मिसाइल रक्षा ढांचा डिटरेंस बाय डिनायल (प्रतिरोध के माध्यम से सुरक्षा) को मजबूत कर सकता है, लेकिन अलग-अलग दिशाओं से आने वाली और चाल बदलने में सक्षम मिसाइलों को रोकना तकनीकी रूप से बेहद कठिन है। एडमिरल रिचर्ड कॉरेल ने इसके जवाब में स्पष्ट किया कि इस परियोजना का पहला चरण उन्नत डिटेक्शन और ट्रैकिंग सेंसर विकसित करना होगा, ताकि दुश्मन की मिसाइलों का सटीक पीछा किया जा सके। इसके लिए अंतरिक्ष-आधारित इंटरसेप्टर जैसी नई तकनीकों के विकास की आवश्यकता होगी। मिसाइल रक्षा प्रणाली के साथ-साथ, सुनवाई में चीन की तेजी से बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई। सीनेटर केली ने बताया कि चीन के एसजे-5 और एसजे-21 उपग्रहों ने कक्षा में जिस तरह के पैंतरे दिखाए हैं और सैटेलाइट रीफ्यूलिंग (उपग्रहों में ईंधन भरना) का सफल प्रयोग किया है, वह अमेरिकी संसाधनों के लिए नया खतरा है। अमेरिकी स्पेस कमांड के प्रमुख जनरल स्टीफन व्हाइटिंग ने भी इन गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने की पुष्टि की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बीजिंग ने अंतरिक्ष में स्थायी पैंतरेबाज़ी की क्षमता विकसित कर ली, तो उसे वैसा ही लाभ मिलेगा जैसा अमेरिका ने जमीन, समुद्र और हवा में हासिल किया है। व्हाइटिंग के अनुसार, अमेरिका को भी अपनी मैन्यूवर वॉरफेयर क्षमता विकसित करनी चाहिए ताकि अंतरिक्ष में सैन्य बढ़त को बरकरार रखा जा सके। अंततः, यह सुनवाई यह साफ करती है कि अमेरिका अब केवल मिसाइल हमलों से सुरक्षा ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में चीन के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा और खरबों डॉलर के बजट प्रबंधन के बीच एक कठिन संतुलन बनाने की चुनौती से जूझ रहा है। वीरेंद्र/ईएमएस 29 मार्च 2026