अंतर्राष्ट्रीय
31-Mar-2026
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तेल अवीव(ईएमएस)। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को खत्म करने के लिए पाकिस्तान चौधरी बनने की कोशिश कर रहा था। तभी इजरायल ने उसे आइना दिखाते हुए कह दिया कि वो क्या मध्यस्थता करेगा जो खुद समस्या है। इसके लिए एक मात्र भारत ही है जो समाधान का बेहतर रास्ता निकाल सकता है। एक साक्षात्कार के दौरान इजरायली विदेश मंत्रालय की विशेष दूत फ्लूर हसन-नहूम ने पाकिस्तान की भूमिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों का प्रयास केवल खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक बनाए रखने की एक कोशिश है। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि पाकिस्तान स्वयं जिहादी आतंकवाद की समस्या से जूझ रहा है, ऐसे में उनकी मध्यस्थता के सफल होने की संभावना बेहद कम है। हसन-नहूम ने भारत की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत इजरायल का एक बेहद करीबी और भरोसेमंद सहयोगी है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत के सभी पक्षों के साथ संतुलित और बेहतरीन संबंध हैं, जो उसे पाकिस्तान की तुलना में एक बेहतर विकल्प बनाते हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर इस संघर्ष को सुलझाने के लिए वार्ता की मेजबानी का प्रस्ताव रख चुके हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भी पुष्टि की थी कि वे सऊदी अरब, मिस्र और तुर्किये के साथ चर्चा के बाद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आयोजित करने की योजना बना रहे हैं। पाकिस्तान का तर्क है कि इस संघर्ष के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर संकट मंडरा रहा है, जिसे रोकने के लिए वे पहल कर रहे हैं। हालांकि, पाकिस्तान और अमेरिका के इन प्रयासों को ईरानी पक्ष से बड़ा झटका लगा है। ईरान ने स्पष्ट रूप से अमेरिका के साथ किसी भी सीधी वार्ता से इनकार कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि उन्हें मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका के संदेश मिले हैं, लेकिन उनमें रखी गई शर्तें पूरी तरह अतार्किक हैं। बघाई ने साफ किया कि ईरान पर सैन्य हमला हुआ है और फिलहाल उनकी पूरी प्राथमिकता अपनी रक्षा करने पर है। ईरान ने पाकिस्तान में हो रही बैठकों और मध्यस्थता की कोशिशों से खुद को अलग करते हुए कहा कि यह पाकिस्तान की अपनी व्यक्तिगत पहल हो सकती है, जिसमें तेहरान की कोई भागीदारी नहीं है। ईरान का रुख है कि अब तक जो भी संचार हुआ है, वह केवल तीसरे देशों के माध्यम से हुआ है और सीधी बातचीत की कोई संभावना फिलहाल नजर नहीं आती। इस घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया है कि मध्य पूर्व का संकट कूटनीतिक दांव-पेचों के बीच और उलझता जा रहा है। वीरेंद्र/ईएमएस/31मार्च2026 --------------------------------