यरूशलेम,(ईएमएस)। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने अब तक का सबसे खतरनाक मोड़ ले लिया है। पिछले चार हफ्तों से युद्ध से दूरी बनाए रखने वाले यमन के हूती विद्रोहियों ने अब सीधे इजरायल पर मिसाइलें दागकर इस जंग में अपनी सक्रिय भागीदारी का ऐलान कर दिया है। हूतियों की इस एंट्री से इजरायल के लिए सुरक्षा चुनौती तो बढ़ी ही है, लेकिन असली खतरा वैश्विक अर्थव्यवस्था के चोक पॉइंट्स पर मंडरा रहा है। यमन की भौगोलिक स्थिति लाल सागर और अदन की खाड़ी के मुहाने पर है। इन दोनों को जोड़ने वाला बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार के लिए धड़कन की तरह है, जहाँ से दुनिया का करीब 12 प्रतिशत व्यापार गुजरता है। यदि हूती विद्रोही इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही रोकते हैं या अपनी मिसाइल क्षमता का उपयोग समुद्री नाकेबंदी के लिए करते हैं, तो इसका असर सीधे तौर पर हर देश की रसोई और बाजार पर पड़ेगा। चिंता की बात यह है कि दुनिया पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य के संकट से जूझ रही है, जहाँ से यदि होर्मुज और बाब अल-मंदेब दोनों रास्ते एक साथ प्रभावित होते हैं, तो वैश्विक सप्लाई चेन को ऐसा दोहरा झटका लगेगा जिससे उबरना नामुमकिन हो सकता है। हूतियों के इस कदम ने न केवल क्षेत्रीय युद्ध की आग को भड़का दिया है, बल्कि दुनिया की जीवन रेखा कहे जाने वाले समुद्री व्यापारिक मार्गों पर भी संकट के बादल गहरे कर दिए हैं। यमन की राजधानी सना और देश के एक बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखने वाला यह समूह अब इस त्रिकोणीय संघर्ष (अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान) में एक निर्णायक भूमिका निभाने की ओर बढ़ रहा है। खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति रुकने की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। जहाजों को मजबूरन अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप का लंबा रास्ता तय करना होगा, जिससे माल ढुलाई का समय दो हफ्ते बढ़ जाएगा और लागत में भारी वृद्धि होगी। आर्थिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो वैश्विक जीडीपी विकास दर में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ सकती है। विशेष रूप से ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्र, जो समयबद्ध आपूर्ति पर निर्भर हैं, पूरी तरह चरमरा सकते हैं। हालांकि, अमेरिका और इजरायल ने पहले भी हूतियों के ठिकानों पर हवाई हमले कर उन्हें पीछे धकेलने की कोशिश की है, लेकिन इस बार हूतियों का आक्रामक रुख संकेत दे रहा है कि वे पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। फिलहाल पूरी दुनिया की सांसें थमी हुई हैं, क्योंकि हूतियों का अगला कदम यह तय करेगा कि यह संघर्ष क्षेत्रीय सीमा में रहेगा या एक बड़े वैश्विक विनाश का रूप लेगा। वीरेंद्र/ईएमएस/29मार्च2026