मुंबई, (ईएमएस)। पिछले कुछ महीनों से मुंबई एवं आसपास के उपनगरों में कई लोग सायबर जालसाजों के जाल में फंसकर करोड़ों रुपया गंवा चुके हैं। इसी कड़ी में सायबर जालसाज़ों द्वारा एक बुजुर्ग दंपत्ति से 2.84 करोड़ रुपये ठगने का मामला सामने आया है। मिली जानकारी के अनुसार सायबर जालसाजों ने खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी बताकर एक 70 साल के बुज़ुर्ग पति-पत्नी को धमकाया कि पत्नी का आधार कार्ड लखनऊ एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए 90 आतंकवादियों में से एक के पास से मिला है। यह जांचने के लिए कि उनका पैसा असली है या नहीं, फर्जी पुलिस वालों ने बुज़ुर्ग जोड़े से सत्यापन के लिए उन्हें पैसे भेजने को कहा और भरोसा दिलाया कि एक बार क्लीन चिट मिल जाने पर वे पैसे लौटा देंगे। दंपत्ति ने नौ लेन-देन में 2.84 करोड़ रुपये भेजे लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें फर्जी पुलिस वालों ने ठग लिया है। ईस्ट साइबर पुलिस स्टेशन ने आठ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ बीएनएस के तहत धोखाधड़ी, जालसाज़ी और ज़बरन वसूली तथा आईईटी एक्ट के तहत पहचान की चोरी का मामला दर्ज किया। कथित डिजिटल गिरफ्तारी का यह अपराध पिछले साल 16 दिसंबर से इस साल 23 मार्च के बीच हुआ। 77 साल के पति, जो शेयर बाज़ार में कारोबार करते हैं, ने पुलिस को बताया कि वह अपनी 72 साल की पत्नी के साथ कांजुर मार्ग में रहते हैं। पत्नी राज्य सरकार के सहकारिता और विपणन विभाग में वरिष्ठ निजी सहायक के पद से सेवानिवृत्त हुई थीं। दंपत्ति के दो बेटों में से एक विदेश में काम करता है। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि 16 दिसंबर को एक अज्ञात व्यक्ति ने उनकी पत्नी को फोन किया और खुद को मुंबई पुलिस मुख्यालय से पुलिस इंस्पेक्टर रंजीत कुमार बताया। फिर उसने मेरी पत्नी से कहा कि उनका आधार कार्ड एक आतंकवादी संगठन के बैंक खाते से जुड़ा हुआ है और इसकी जांच लखनऊ एटीएस कर रही है। उसने कहा कि लखनऊ एटीएस के अधिकारी प्रेम कुमार गौतम इस संबंध में उनसे संपर्क करेंगे। डरकर पत्नी ने अपने पति को इस बारे में बताया। बाद में, उन्हें एक व्यक्ति का फोन आया जिसने कहा कि वह लखनऊ एटीएस से प्रेम कुमार गौतम है और एटीएस ने 90 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है। गौतम ने शिकायतकर्ता को बताया कि उनकी पत्नी का आधार कार्ड उन आतंकवादियों में से एक के पास से मिला ह और उनके वरिष्ठ अधिकारी अजय श्रीवास्तव इस संबंध में उनसे संपर्क करेंगे। फिर एक और व्यक्ति, अजय श्रीवास्तव ने शिकायतकर्ता की पत्नी को फोन किया। उसने कहा कि शिकायतकर्ता की पत्नी के बैंक खाते में 70 लाख रुपये जमा किए गए हैं और आगे की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के माध्यम से की जा रही है। बाद में, श्रीवास्तव ने वॉट्सऐप के ज़रिए शिकायतकर्ता की पत्नी को एनआईए का लोगो लगा हुआ गोपनीयता समझौता नाम का दस्तावेज़ भेजा। श्रीवास्तव द्वारा भेजे गए एक डॉक्यूमेंट में आरबीआई के एक डिप्टी गवर्नर के नकली दस्तखत थे। श्रीवास्तव ने उस जोड़े से कहा कि एनआईए चीफ़ इस घटना के बारे में उनसे सिग्नल ऐप के ज़रिए संपर्क करेंगे। आरोपी ने उस जोड़े से यह भी कहा कि वे हर चार घंटे में उन्हें एक मैसेज भेजें, जिसमें लिखा हो, हम राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ सुरक्षित हैं। श्रीवास्तव ने शिकायतकर्ता को सिग्नल पर एक मैसेज भी भेजा, जिसमें कहा गया था कि उनकी एनआईए चीफ़ के साथ मीटिंग तय है। वॉट्सऐप कॉल पर हुई मीटिंग के दौरान, फर्जी एनआईए चीफ़ ने शिकायतकर्ता से वेरिफिकेशन के लिए सारे पैसे भेजने को कहा और जाँच के बाद उन्हें लौटाने का भरोसा दिलाया। जब शिकायतकर्ता को अपने पैसे वापस नहीं मिले, तो उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ धोखा हुआ है। फिर वे अपनी पत्नी के साथ मध्य मुंबई में पेडर रोड स्थित एनआईए दफ़्तर गए, जहाँ उन्हें साइबर पुलिस स्टेशन जाने को कहा गया। बहरहाल सायबर पुलिस मामले की जाँच कर रही है। संजय/संतोष झा-२९ मार्च/२०२६/ईएमएस