अंतर्राष्ट्रीय
29-Mar-2026


. मिडिल ईस्ट में हजारों मरीन तैनात, अमेरिका ने 3500 सैनिक पहुंचे, अमेरिका-इजराइल के लिए कम नहीं मुश्किलें ईरान के पास 2 साल तक युद्ध लडऩे की क्षमता तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन(ईएमएस)। मिडिल ईस्ट में एक महीने से चल रही जंग थमती नजर नहीं आ रही है। इरान जहां अमेरिका और इजराइल के ठिकानों पर लगातार हमले कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी और बढ़ा दी है। अमेरिकी वॉरशिप यूएसएस त्रिपोली करीब 3,500 सैनिकों (मरीन और नेवी) के साथ इस इलाके में पहुंच गया है। इस तैनाती से वहां पहले से मौजूद करीब 50,000 अमेरिकी सैनिकों की संख्या और बढ़ गई है। यह ऐसे समय में हुआ है जब इस बात को लेकर अटकलें तेज हो रही हैं कि क्या वॉशिंगटन ईरान में जमीनी सैनिक भेजने पर विचार कर सकता है। लेकिन अमेरिका-इजराइल के लिए मुश्किलें कम नहीं होने वाली हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान की मिसाइल ताकत को लेकर सामने आ रही नई जानकारियों ने अमेरिका की चिंता को बढ़ा दिया है। कई मीडिया रिपोर्टस में ईरान ने दावा करते हुए मिसाइल बेस के कई वीडियो और विजुअल्स जारी किए हैं। जिसमें ऐसे अंडरग्राउंड मिसाइल बेस दिखाई दे रहे हैं, जो जमीन की गहराइयों और पहाड़ों के भीतर बनाए गए हैं। अमेरिका और इजरायल की एजेंसियों के लिए इनका पता लगाना मुश्किल हो रहा है। वो हमले तो कर रहे हैं लेकिन ईरानी मिसाइल के ठिकानों को उतनी रफ्तार से ध्वस्त नहीं कर पा रहे। मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक, अब तक ईरान के कुल मिसाइल भंडार का केवल लगभग एक-तिहाई हिस्सा ही नष्ट किया जा सका है, जबकि बड़ी संख्या में हथियार अब भी सुरक्षित ठिकानों पर मौजूद हैं। ऐसे में ईरान की मिसाइल सिटी और अंडरग्राउंड नेटवर्क ने यह साफ कर दिया है कि यह संघर्ष केवल खुले मैदान की लड़ाई नहीं, बल्कि तकनीक, रणनीति और छुपाव की जंग भी है। इन हालातों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने रणनीतिक चुनौती और गहरी होती दिख रही है। एक तरफ ईरान की छिपी सैन्य क्षमता, तो दूसरी ओर वैश्विक दबाव दोनों मिलकर अमेरिकी नीति को कठिन मोड़ पर ले आए हैं। 70 प्रतिशत मिसाइल अब भी इस्तेमाल नहीं ईरान के सांसद मालेक शारियाती का दावा है कि तीन हफ्तों की जंग के बावजूद देश ने अब तक अपने करीब 70 प्रतिशत मिसाइल भंडार का इस्तेमाल ही नहीं किया है। वहीं, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्र्स के ब्रिगेडियर जनरल आमिर अली हाजीजादेह के अनुसार, ईरान के पास इतने मिसाइल बेस और हथियार हैं कि अगर हर हफ्ते उनका खुलासा किया जाए, तो भी दो साल तक यह सिलसिला जारी रह सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान ने संभावित हमलों को ध्यान में रखते हुए अपने मिसाइल सिस्टम को अलग-अलग गुप्त ठिकानों पर फैला रखा है। यही वजह है कि अमेरिका और इजराइल को उन ठिकानों का पता लगाने ऐड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है। इसके बाद भी ठिकानों का पता नहीं चल रहा है। मिसाइल बेस के अलावा भी कई गुप्त ठिकाने ईरान के पास सिर्फ ये चार मिसाइल बेस नहीं बल्कि ऐसे कई ठिकाने हैं, जहां मिसाइलें रेडी टू फायर मोड में रहती हैं। उसके घातक और सबसे ताकतवर मिसाइलों में फतह, खुर्रमशहर, बद्र, जुल्फिकार और कासिम जैसे नाम शामिल हैं। अभी सिर्फ 33 प्रतिशत मिसाइलें नष्ट या खत्म हुई हैं तो बाकी की 67 प्रतिशत कहां हैं। शायद वो इन अंडरग्राउंड सिटी और पहाडिय़ों की अनंत गहराइयों में छिपाकर रखी गई हैं ताकि वक्त आने पर दुश्मन खेमे में कोहराम मचाया जा सके। विनोद उपाध्याय / 29 मार्च, 2026