अंतर्राष्ट्रीय
30-Mar-2026
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तेहरान (ईएमएस)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और आर्थिक संकट के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था गंभीर दौर में पहुंच गई है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि यहां 1 करोड़ ईरानी रियाल का नोट भी आम लोगों की बुनियादी जरूरतें पूरी करने में नाकाफी साबित हो रहा है। राजधानी तेहरान से सामने आई तस्वीरें और रिपोर्ट्स बताती हैं कि महंगाई ने मुद्रा की कीमत करीब खत्म कर दी है। हाल ही में ईरान ने 10 मिलियन (1करोड़) रियाल के नए नोट जारी किए हैं, जबकि इससे पहले 5 मिलियन रियाल के नोट भी बाजार में आए थे। इसके बावजूद जनता को राहत नहीं मिल रही है। भारतीय मुद्रा से तुलना में 1 करोड़ ईरानी रियाल की कीमत महज 600 से 725 रुपये के बीच बैठती है, जबकि अमेरिकी डॉलर में यह लगभग 7 डॉलर के बराबर है। इसके बाद बड़ी रकम होने के बावजूद क्रय शक्ति बेहद कमजोर हो गई है। इसकारण खाद्य वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। आटा करीब 5.2 लाख रियाल प्रति किलो, चावल 2 लाख रियाल प्रति किलो और दूध करीब 6 लाख रियाल प्रति लीटर बिक रहा है। इसके बाद एक आम परिवार के लिए एक दिन का साधारण भोजन जुटाना भी मुश्किल हो गया है। कई परिवारों का कहना है कि पांच लोगों के लिए एक दिन का न्यूनतम खर्च 3 करोड़ रियाल तक पहुंच गया है, वह भी बिना मांस और फलों के। विशेषज्ञों के अनुसार, दिसंबर 2025 में ईरान की महंगाई दर 40 प्रतिशत से अधिक पहुंच गई थी, जबकि खाद्य पदार्थों की महंगाई 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है। स्थिति द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के सबसे खराब आर्थिक दौरों में गिनी जा रही है। आर्थिक संकट के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। अमेरिका और यूरोपीय देशों के कड़े प्रतिबंधों के चलते ईरान का तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में भारी कमी आई है। इसके अलावा युद्ध की स्थिति ने आयातित वस्तुओं को और महंगा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती महंगाई और लगातार नोट छापने की नीति ने स्थिति को और खराब किया है। यदि जल्द ही हालात नहीं सुधरे, तो ईरान की अर्थव्यवस्था और गहरे संकट में जा सकती है, जिसका सीधा असर आम जनता के जीवन पर पड़ेगा। आशीष/ईएमएस 30 मार्च 2026