नई दिल्ली (ईएमएस)। हमारे देश में कुत्तों के साथ सफर करना अब एक नया ट्रेंड बनता जा रहा है। “पेट ट्रेवल” तेजी से एक नया ट्रेंड बनता जा रहा है, जिसमें लोग अपने डॉग्स को कार, ट्रेन और फ्लाइट के जरिए अपने साथ लेकर यात्रा कर रहे हैं। आज के दौर में पालतू कुत्ते केवल घर की सुरक्षा या शौक का हिस्सा नहीं रह गए हैं, बल्कि परिवार के सदस्य बन चुके हैं। यही वजह है कि अब लोग छुट्टियों या शिफ्टिंग के दौरान उन्हें घर पर छोड़ना पसंद नहीं करते। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस साल त्योहारों के सीजन में 462 कुत्तों ने ट्रेन के जरिए सफर किया, जिनमें देसी और विदेशी दोनों नस्लें शामिल थीं। डॉग के साथ यात्रा के लिए कार सबसे आसान और आरामदायक विकल्प माना जाता है। यदि कोई व्यक्ति अपने पेट के साथ लंबी दूरी तय कर रहा है, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद अहम होता है। जैसे डॉग के लिए सीट बेल्ट हार्नेस या कैरियर का उपयोग करना, हर 2-3 घंटे में ब्रेक लेकर उसे वॉक कराना, पर्याप्त पानी और भोजन साथ रखना और गाड़ी के अंदर उचित तापमान बनाए रखना। इन सावधानियों से पेट को सुरक्षित और आरामदायक सफर मिल सकता है। ट्रेन से यात्रा के लिए इंडियन रेलवेज ने भी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। यात्री फर्स्ट एसी में पूरा केबिन बुक कर अपने कुत्ते को साथ रख सकते हैं। इसके अलावा लगेज वैन में “डॉग बॉक्स” के जरिए भी पेट को भेजने का विकल्प मौजूद है। इस प्रक्रिया के लिए कुछ जरूरी दस्तावेजों की आवश्यकता होती है, जैसे वेटरनरी डॉक्टर द्वारा जारी फिटनेस सर्टिफिकेट और वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र। बुकिंग के समय निर्धारित फॉर्म भरना होता है और डॉग के वजन के अनुसार चार्ज लिया जाता है, जो आमतौर पर 30 से 100 रुपये प्रति किलो या उससे अधिक हो सकता है। फ्लाइट में भी अब कई एयरलाइंस पेट ट्रैवल की सुविधा दे रही हैं, जिनमें एयर इंडिया प्रमुख है। छोटे कुत्तों को केबिन में ले जाने की अनुमति मिल सकती है, जबकि बड़े कुत्तों को कार्गो सेक्शन में ट्रांसपोर्ट किया जाता है। इसके लिए हेल्थ सर्टिफिकेट, वैक्सीनेशन प्रूफ और पहले से बुकिंग व अनुमति लेना जरूरी होता है। साथ ही, यात्रा से पहले पेट को ट्रेन करना, ज्यादा खाना न देना और आपात स्थिति के लिए डॉक्टर का संपर्क नंबर रखना भी महत्वपूर्ण है। इस बढ़ते ट्रेंड के पीछे भावनात्मक जुड़ाव सबसे बड़ा कारण है। लोग अपने पालतू जानवरों को परिवार का हिस्सा मानते हैं और उन्हें अकेला छोड़ना मुश्किल समझते हैं। सुदामा/ईएमएस 30 मार्च 2026